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क्या अजित पवार बनेंगे किंग ? क्या हाथ आएगी महाराष्ट्र की सत्ता की चाबी? महाराष्ट्र की सियासत अब निर्णायक मोड़ पर

Will Ajit Pawar become king? Will we get the key to power in Maharashtra? Maharashtra politics now at a crucial juncture ​

समग्र समाचार सेवा
मुंबई,10 जनवरी। महाराष्ट्र की सियासत अब निर्णायक मोड़ पर खड़ी है. स्पीकर को आज एकनाथ शिंदे के खिलाफ अयोग्यता नोटिस पर फैसला लेना है. अगर सीएम शिंदे का गेम बिगड़ा तो महाराष्ट्र की सत्ता की चाबी अजित पवार के हाथ में आ जाएगी. ऐसे में अजित पवार किंगमेकर बनकर ही रह जाएंगे या किंग बनेंगे?

महाराष्ट्र की सियासत में लगातार दो साल दो बड़ी बगावतें लेकर आए. 20 जून 2022 को शिवसेना विधायक एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बागी हो गए थे. तब उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी. शिवसेना के बागी विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के समर्थन से नई सरकार बना ली और एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बन गए. इस बगावत के करीब एक साल बाद ही अजित पवार ने चाचा शरद पवार से बगावत कर दी. 2 जुलाई 2023 को अजित पवार ने शिंदे सरकार का समर्थन कर दिया और डिप्टी सीएम पद की शपथ ले ली.

अजित पवार के एनसीपी के 41 विधायकों के साथ शिंदे सरकार में शामिल होने के बाद से ही सीएम को लेकर एक नई चर्चा छिड़ गई. 40 विधायकों वाले एकनाथ शिंदे ही सीएम रहेंगे या सरकार की कमान अजित के हाथ आएगी, इसे लेकर चर्चा तेज हुई तो डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस को यह कहना पड़ा था सीएम शिंदे ही रहेंगे. लेकिन अब महाराष्ट्र की सियासत एक नए मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है. स्पीकर राहुल नार्वेकर को सीएम शिंदे समेत विधायकों की अयोग्यता को लेकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले धड़े की ओर से दिए गए नोटिस पर फैसला लेना है. अब निर्णय की घड़ी आ गई है तो साथ ही यह चर्चा फिर से तेज ह है कि अगर एकनाथ शिंदे को विधानसभा की सद के अयोग्य ठहरा दिया जाता है तो नया सीएम कौन होगा? विधानसभा में सीटों का समीकरण क्या होगा?
महाराष्ट्र विधानसभा में इस समय 286 विधायक हैं और बहुमत के लिए जरूरी जादुई आंकड़ा 144 सीटों का है. उद्धव गुट ने चार ग्रुप में शिंदे गुट के विधायकों के खिलाफ अयोग्यता का नोटिस दिया है. अब अगर सीएम शिंदे समेत 16 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है तो विधायकों की संख्या 270 रह जाएगी और ऐसे में बहुमत के लिए जरूरी जादुई आंकड़ा भी 136 रह जाएगा.

केवल बीजेपी, शिवसेना शिंदे गुट और अजित पवार के विधायकों की संख्या ही देखें तो शिंदे सरकार के पास इस समय 185 विधायकों का समर्थन है. बीजेपी के 104, अजित पवार गुट के 41 और शिवसेना शिंदे गुट के 40 विधायक हैं. 16 विधायक अयोग्य घोषित किए जाते हैं तो शिंदे गुट का संख्याबल 24 रह जाएगा और सरकार का नंबर गेम भी 185 से गिरकर 169 विधायकों पर आ जाएगा जो बहुमत के लिए जरूरी 136 से कहीं अधिक है. यानी शिंदे गुट के विधायको को अयोग्य ठहराए जाने की स्थिति में भी गठबंधन सरकार के पास बहुमत रहेगा लेकिन सत्ता के शीर्ष पर बदलाव भी तय हो जाएगा.

विधानसभा की सदस्यता से अगर अयोग्य घोषित किया जाता है तो एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा. सीएम के इस्तीफे का सीधा मतलब है कि विधायक दल को नया नेता चुनना होगा और नए सिरे से सरकार गठन की कवायद करनी होगी. मंत्रिमंडल का भी नए सिरे से गठन होगा. ऐसे में क्या अजित पवार किंग बन सकेंगे?

अजित पवार के हाथ आ जाएगी सत्ता की चाबी
अजित पवार ने जब शिंदे सरकार में शामिल होने का ऐलान किया, डिप्टी सीएम की शपथ ले ली, तभी से यह चर्चा चलती रही कि बहुमत में होने के बावजूद बीजेपी को उनकी जरूरत क्यों पड़ी? शिंदे को सीन पद से हटाए जाने की अटकलें लगने लगीं, अजित को सीएम बनाए जाने के कयास भी सियासी फिजां में तैरने लगे. अब जब फैसले की घड़ी आ गई है, यही सवाल फिर से उठने लगा है कि अगर सीएम शिंदे को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जाता है तो क्या अजित पवार सीएम बनेंगे या महज किंगमेकर बनकर ही रह जाएंगे?

दरअसल, सियासी परिस्थितियां बदलीं तो अजित पवार किंगमेकर बनकर उभरेंगे. नई सरकार को बहुमत के लिए 136 विधायकों की जरूरत होगी और सरकार के पास जिन 169 विधायकों का समर्थन है उनमें 41 अजित पवार के समर्थक हैं. अजित के विधायकों को घटा दें तो बीजेपी और शिंदे समर्थक विधायकों की संख्या 128 तक ही पहुंचती है. ऐसे में बीजेपी और शिंदे की शिवसेना बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से नौ पीछे रह जाएंगे. यानी अजित के समर्थन के बिना न तो एनडीए सरकार बना पाएगा और ना ही विपक्षी कांग्रेस, उद्धव ठाकरे और शरद पवार के नेतृत्व वाला एनसीपी का धड़ा ही.

कैसे किंग बन सकते हैं अजित पवार?
एकनाथ शिंदे और उनके समर्थक विधायक अगर अयोग्य घोषित किए जाते हैं तो अजित पवार के दोनों हाथों में लड्डू होंगे. हो सकता है कि सत्ता बचाए रखने के लिए बीजेपी 41 विधायकों के नेता अजित पवार को सीएम बनाने का दांव चल दे. इसके पीछे तर्क ये दिया जा रहा है कि सरकार बनाने के लिए पार्टी जब 40 विधायकों वाले शिंदे को सीएम बना सकती है तो अजित के साथ फिर भी 41 विधायक हैं. दूसरी तस्वीर यह भी है कि अजित अगर एनडीए से एग्जिट कर चाचा शरद के साथ चले जाते हैं तो हो सकता है कि शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस के समर्थन से वह सीएम बन जाएं.

20 जून 2022 को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना विधायकों ने बगावत का बिगुल फूंका था. तब से अब तक, न सिर्फ सत्ता की कमान और विधानसभा के भीतर ट्रेजरी बेंच और विपक्ष बदल चुके हैं, बदल चुका है शिवसेना और एनसीपी का नंबर गेम भी. बदल गए हैं दोस्त और दुश्मन भी. बदल गए हैं सूबे में नेताओं के संबंधों के समीकरण भी. एकनाथ शिंदे ने जिन अजित पवार पर शिवसेना विधायकों को बजट आवंटित नहीं करने और विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए उद्धव से बगावत कर दी थी, उन्हीं अजित पवार को अपनी सरकार में भी वित्त मंत्रालय ही दिए हुए हैं.

शरद पवार के साथ साए की तरह नजर आने वाले अजित आज उनकी उम्र का जिक्र करते हुए रिटायरमेंट पर घेर रहे हैं, चुनाव आयोग में एनसीपी पर कब्जे की जंग लड़ रहे हैं. उद्धव ठाकरे भी पार्टी का नाम-निशान गंवा चुके हैं, राजनीतिक दृष्टि से कमजोर हुए हैं. ऐसे में क्या ये तमाम समीकरण पांचवीं बार के डिप्टी सीएम अजित पवार की सीएम पद पर ताजपोशी रास्ता खोल पाएंगे?

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