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नौकरी के बदले जमीन मामला: सियासी उठापटक के बीच बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बेटी मीसा को कोर्ट ने भेजा नोटिस

समग्र समाचार सेवा
पटना , 27 जनवरी। बिहार में सियासी उठापटक के बीच ‘नौकरी के बदले जमीन’ घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनकी बेटी मीसा भारती तथा हेमा यादव सहित अन्य को तलब किया गया है. कोर्ट ने नोटिस भेजा है. अदालत ने रेलवे में ‘नौकरी के बदले जमीन’ से जुड़े धनशोधन मामले में उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के आरोप पत्र पर संज्ञान लेने के बाद इन्हें तलब किया है. विशेष न्यायाधीश विशाल ने आरोपियों को नौ फरवरी को अदालत में पेश होने का निर्देश देते हुए कहा कि मामले में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार हैं.

न्यायाधीश ने व्यवसायी अमित कात्याल के खिलाफ भी पेशी वारंट जारी किया, जो फिलहाल मामले में न्यायिक हिरासत में हैं. राजद प्रमुख लालू प्रसाद के परिवार के एक कथित ‘‘करीबी सहयोगी’’ कात्याल (49), रेलवे कर्मचारी एवं कथित लाभार्थी हृदयानंद चौधरी, दो फर्म ‘ए के इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘ए बी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ को उनके साझा निदेशक शारिकुल बारी के माध्यम से भी आरोप पत्र में नामजद किया गया है.

इस मामले में कात्याल को पिछले साल नवंबर में ईडी ने गिरफ्तार किया था और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को एजेंसी ने तलब किया था, लेकिन वह अब तक पेश नहीं हुए हैं. राजद प्रमुख के बेटे एवं बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव एक बार एजेंसी के सामने पेश हो चुके हैं. उन्हें दोबारा इसके सामने पेश होने को कहा गया है.

ऐसी संभावना है कि एजेंसी मामले में पूरक आरोपपत्र दाखिल करेगी. यह कथित घोटाला उस समय का है जब लालू संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के पहले कार्यकाल में रेल मंत्री थे. अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला लालू के रेल मंत्री(2004-2009) रहने के दौरान रेलवे के पश्चिम जोन में ‘ग्रुप-डी’ के पदों पर नियुक्ति से संबंधित है और आरोप है कि नौकरी के बदले राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन ली गई थी.

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