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टीएमसी सांसद देव ने लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल सरकार के तीन निकायों के पैनल से दिया इस्तीफा

समग्र समाचार सेवा
कोलकाता, 05 फरवरी। लोकसभा चुनाव के पहले घाटल से टीएमसी सांसद और बांग्ला फिल्म अभिनेता देब (दीपक अधिकारी) ने तीन सरकारी समितियों से इस्तीफा दे दिया, जिससे अटकलें लगने लगी है कि क्या वह चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं. हालांकि देब ने इस बारे में कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया, लेकिन उनके तीन कमेटियों से इस्तीफे से राज्य में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. बता दें कि इसके पहले पार्टी की बैठक में पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने साफ संकेत दिया कि वह इस लोकसभा चुनाव में घाटल से देब (दीपक अधिकारी) को मैदान में उतारना चाहती हैं. अभिनेता-सांसद ने यह भी संकेत दिया कि अगर पार्टी नेता आदेश देंगे तो वह चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन एक महीने के भीतर, देब ने तीन कमेटियों के इस्तीफा दे दिया है.

देब ने शनिवार को एक साथ घाटल रवींद्र शताब्दी विश्वविद्यालय, घाटल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रोगी कल्याण संघ और बीरसिंह विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. देब के करीबी लोगों का दावा है कि सांसद ने निजी कारणों से तीनों समितियों से इस्तीफा दिया होगा. हालांकि राज्य मंत्री शशि पांजा ने कहा, ”शायद आप समय नहीं दे सकते. इसके लिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. डॉ शशि पांजा ने देब के इस्तीफा को कम महत्व देने की कोशिश की.

पूर्व विधायक शंकर दुलई से विवाद
बता कि देब ने इसके पहले कहा था कि यदि संभव हुआ, तो वह 2024 के लोकसभा चुनाव में खड़ा नहीं होना चाहते हैं. पश्चिम मेदिनीपुर जिले में पार्टी के एक वर्ग का कहना है कि घाटल के पूर्व विधायक शंकर दलुई से घाटल उत्सव एवं शिशु मेला समिति के गठन को लेकर विवाद चरम पर पहुंच गया था. देब को बाहर करने पर ही कमेटी का अध्यक्ष फाइनल हुआ था. हालांकि इसके बाद सांसद के समर्थक चुप हो गये. हालांकि सांसद ने इस बारे में कभी भी सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है. इस संबंध में न तो पार्टी और न ही किसी अन्य को सार्वजनिक बयान देते देखा गया.

देब को उम्मीदवार बनाने का ऐलान की हैं ममता
आगामी लोकसभा चुनाव में देब की उम्मीदवारी की अटकलें पिछले जनवरी में पश्चिम मेदिनीपुर जिला तृणमूल नेतृत्व की कालीघाट की बैठक में हुई थी. उस बैठक में ममता बनर्जी ने कहा था, ”देब हमारी पार्टी की संपत्ति हैं. कई नेताओं ने उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जिससे उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा.” तृणमूल सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के ऐसी बातें कहने से स्वाभाविक तौर पर बैठक में देब विरोधी नेता थोड़े दबाव में आ गये. लोकसभा चुनाव में उनकी उम्मीदवारी का संकेत तब मौजूद नेताओं को मिल गया जब देब के साथ खड़े होने से ममता बनर्जी जिला नेतृत्व से इस कदर नाराज हो गयीं. लेकिन उसके बाद भी देब ने अचानक तीन सरकारी समितियों के शीर्ष पदों से इस्तीफा क्यों दे दिया. इसे लेकर अटकलें चल रही हैं.

साल 2014 में पहली बार सांसद बने हैं देब
2014 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने घाटल में बंगाली सिनेमा के सुपरस्टार देब को उतारा था. वह पहली बार में ही वाम मोर्चा के सीपीआई उम्मीदवार संतोष राणा को चुनाव में हराकर सांसद बने. देब ने 2019 में पूर्व आईपीएस और बीजेपी उम्मीदवार भारती घोष को हराकर दूसरी बार जीत हासिल की, लेकिन घाटल से कभी-कभी देब और जिला नेतृत्व के बीच विवाद की खबरें सामने आती रहती थीं. इसलिए इस बार लोकसभा चुनाव से काफी पहले उन्होंने दोबारा खड़े न होने का इरादा जाहिर कर दिया. लेकिन जिस तरह से बैठक में ममता उनके साथ खड़ी रहीं और विरोधी गुट के नेताओं पर सवाल उठाए, उससे यह संभव हो गया कि घाटल लोकसभा में उन्हें फिर से तृणमूल उम्मीदवार के तौर पर देखा जा सकता है. लेकिन घाटल अस्पताल के रोगी कल्याण संघ के अध्यक्ष पद से देव के इस्तीफे ने एक बार फिर इस पर सवाल खड़े कर दिये हैं.

वहीं, 2019 में देब के साथ दो अन्य अभिनेत्रियां भी तृणमूल उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में खड़ी हुईं और जीत हासिल की. जादवपुर में मिमी चक्रवर्ती और बशीरहाट से नुसरत जहां सांसद बनीं. क्या वे तृणमूल चुनाव में उम्मीदवार होंगे? जैसे-जैसे देब को लेकर अटकलें बढ़ती जा रही हैं, वैसे-वैसे उन पर सवाल भी उठ रहे हैं.

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