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शैक्षणिक नेतृत्व को जिम्मेदारी, जवाबदेही और नैतिकता के साथ काम करना चाहिए क्योंकि काम ही पूजा है : प्रो एम.एम. गोयल

समग्र समाचार सेवा
कुरूक्षेत्र, 5 जून।  “शैक्षणिक नेतृत्व को जिम्मेदारी, जवाबदेही और नैतिकता के साथ काम करना चाहिए क्योंकि काम ही पूजा है और इसके विपरीत भी ”I ये शब्द तीन बार कुलपति, जिसमें राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान (आरजीएनआईवाईडी श्रीपेरंबदूर) -राष्ट्रीय महत्व का संस्थान , एवं नीडोनोमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. मदन मोहन गोयल ने कहे । वह यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित एनईपी ओरिएंटेशन एंड सेंसिटाइजेशन प्रोग्राम (ऑनलाइन मोड) के प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। उनका विषय ” संस्थागत प्रबंधन को सशक्त बनाना: प्रभावी शासन हेतु शैक्षणिक नेतृत्व रणनीतियाँ ” था । प्रो. प्रीति सुरेश निदेशक एमएमटीटीसी ने स्वागत भाषण दिया एवं प्रो एम.एम. गोयल की उपलब्धियों पर एक प्रशस्ति पत्र प्रस्तुत किया।
नीडोनोमिस्ट गोयल ने बताया कि शैक्षणिक नेतृत्व की प्रभावशीलता और दक्षता को बढ़ाने हेतु हमें गीता-आधारित नीडोनोमिक्स को समझना और अपनाना होगा।

पूर्व वीसी डॉ. गोयल ने बताया कि संस्थागत प्रबंधन में नीडो-गवर्नेंस के लिए शैक्षणिक नेतृत्व में आध्यात्मिक बुद्धि (एसआई) के साथ भिक्षु मन की आवश्यकता होती है।

प्रो. गोयल ने कहा कि शैक्षणिक नेतृत्व को सेल्फ-क्रेडिट और ब्लेम-शिफ्टिंग के ‘आई-सिंड्रोम’ को खत्म करना होगा I

प्रो. गोयल ने समझाया कि संस्थागत प्रबंधन की एक नई कहानी लिखने के लिए शैक्षणिक नेतृत्व को स्ट्रीट स्मार्ट (सरल, नैतिक, कार्य-उन्मुख, उत्तरदायी और पारदर्शी) वैश्विक नागरिक बनIने के लिए साहसी, साहसी और उत्साही होना चाहिए।

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