समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 21जुलाई। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि 2041 तक असम ‘मुस्लिम बहुल’ राज्य बन जाएगा. हिमंता बिस्वा का दावा है कि असम में मुस्लिम आबादी हर 10 साल में करीब 30 प्रतिशत बढ़ रही है. यानि कि हर 10 साल में असम में मुसलमानों की आबादी 11 लाख तक बढ़ जाती है. ऐसे में 2041 तक असम मुस्लिम बहुल राज्य हो जाएगा.
घुसपैठियों के कारण डेमोग्राफी का परिवर्तन हुआ
रांची के धुर्वा स्थित जगन्नाथ मैदान में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए असम सीएम ने कहा कि झारखंड के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं. देश के कई राज्यों में घुसपैठियों के कारण डेमोग्राफी का परिवर्तन हुआ है, आज वह प्रदेश धीरे-धीरे मुस्लिम बहुसंख्यक राज्य होने की ओर बढ़ रहे हैं.
हिमंता बिसवा ने कहा- असम भी ऐसा ही प्रदेश है, जहां 40 प्रतिशत मुसलमान है. जबकि राज्य में असली मुसलमान केवल 4 प्रतिशत हैं. 36 प्रतिशत बांग्लादेश से आए हुए लोग हैं. ऐसे में साल 2041 तक असम सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल प्रदेश बन जाएगा, यह आज असम की हकीकत है.
हर दस साल में 11 लाख बढ़ जाती मुस्लिम आबादी
मुस्लिम बहुसंख्यक राज्य वाले दावे को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि हर 10 साल में असम में मुस्लिम आबादी 11 लाख बढ़ जाती है. यह कोई हिमंत बिस्वा का डेटा नहीं है, बल्कि भारतीय जनगणना का डेटा है, जोकि पब्लिश भी हो चुका है. न्यूज एजेंसी ‘पीटीआई-भाषा’ के मुताबिक, 2011 की जनगणना में असम में कुल मुस्लिम आबादी 1.07 करोड़ थी, जो कुल 3.12 करोड़ निवासियों का 34.22 प्रतिशत थी. राज्य में 1.92 करोड़ हिंदू थे, जो कुल आबादी का लगभग 61.47 प्रतिशत था.
घुसपैठियों का अगला टारगेट झारखंड है
हिमंता बिसवा ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में मुसलमान आबादी की जनसंख्या 26 प्रतिशत ह. धीरे-धीरे ये प्रतिशत भी हर 10 साल में 29 प्रतिशत की स्पीड से बंगाल में बढ़ रही है. असम और बंगाल को हम छोड़ दें, तो बांग्लादेशी घुसपैठियों का अगला टारगेट झारखंड बना हुआ है. आज झारखंड के कई सारे जिलों में मुसलमानों की जनसंख्या 30 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है.
हिमंता बिसवा ने राहुल गांधी से की ये अपील
असम सीएम ने कांग्रेस का कटाक्ष करते हुए कहा, कि मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि को रोकने में कांग्रेस पार्टी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. हिमंता बिसवा ने कहा कि अगर राहुल गांधी जनसंख्या नियंत्रण के ब्रांड एंबेसडर बन जाते हैं, तो इस पर काबू पाया सकता है क्योंकि समुदाय केवल उनकी बात सुनता है.

