समग्र समाचार सेवा
बेंगलुरु,27 फरवरी। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में अलंद स्थित लाडले मशाक दरगाह में महाशिवरात्रि के अवसर पर हिंदू समुदाय को पूजा करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला कर्नाटक वक्फ ट्रिब्यूनल के पूर्व के आदेश को बरकरार रखते हुए दिया गया है, जिसमें धार्मिक अनुष्ठानों के लिए एक निर्धारित समय-सारणी तय की गई थी।
कोर्ट का आदेश
अदालत के आदेश के अनुसार:
- मुस्लिम समुदाय को सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक उर्स से संबंधित अनुष्ठान करने की अनुमति होगी।
- हिंदू भक्तों को दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक राघव चैतन्य शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति दी गई है।
- पूजा के लिए अधिकतम 15 श्रद्धालुओं को दरगाह में प्रवेश की अनुमति दी गई है।
इतिहास और विवाद
लाडले मशाक दरगाह का संबंध 14वीं शताब्दी के सूफी संत और 15वीं शताब्दी के हिंदू संत राघव चैतन्य से जोड़ा जाता है। यह स्थल ऐतिहासिक रूप से दोनों समुदायों के लिए श्रद्धा का केंद्र रहा है। हालांकि, 2022 में धार्मिक अधिकारों को लेकर यहां तनाव बढ़ गया था, जिससे सांप्रदायिक अशांति उत्पन्न हो गई थी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
संभावित विवादों को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन CrPC की धारा 144 लागू कर दी है, जिससे सार्वजनिक जमावड़ों पर प्रतिबंध रहेगा। सुरक्षा को मजबूत करने के लिए:
- 12 चेकपोस्ट स्थापित किए गए हैं।
- ड्रोन से निगरानी की जा रही है।
- पुलिस अधीक्षक ईशा पंत ने बताया कि किसी भी दुकान को बंद करने का आधिकारिक आदेश नहीं दिया गया है, लेकिन कई स्थानीय दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए हैं।
न्यायालय का सख्त निर्देश
उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि आदेश का पालन सख्ती से किया जाए और स्थल की वर्तमान स्थिति को बरकरार रखा जाए। इसके अलावा, जिला उपायुक्त यशवंत गुरूकर सहित अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अदालत के आदेश को सुचारू रूप से लागू करें और शांति बनाए रखें।
निष्कर्ष
यह फैसला धार्मिक सहिष्णुता और सांप्रदायिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सतर्क है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि आगामी महाशिवरात्रि पर दरगाह में पूजा और उर्स के आयोजन किस तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होते हैं।