समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,29 मार्च। धानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को बिहार में चार लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड पटना-सासाराम कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी। यह परियोजना ₹3,712.40 करोड़ की अनुमानित लागत से पूरी की जाएगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, यह कॉरिडोर राज्य में यातायात को सुगम बनाने और क्षेत्रीय विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वर्तमान में सासाराम, आरा और पटना के बीच यात्रा में 3-4 घंटे का समय लगता है, क्योंकि राज्य राजमार्गों पर भारी भीड़ रहती है। इस समस्या को दूर करने और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कैबिनेट आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने 120.10 किमी लंबे ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड कॉरिडोर को हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) के तहत मंजूरी दी है।
यह नया कॉरिडोर NH-19, NH-319, NH-922, NH-131G और NH-120 जैसे प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ेगा, जिससे औरंगाबाद, कैमूर और पटना के बीच निर्बाध यात्रा सुनिश्चित होगी।
यह परियोजना सिर्फ कनेक्टिविटी ही नहीं बल्कि राज्य के समग्र विकास को भी गति देगी। कॉरिडोर के माध्यम से प्रमुख परिवहन सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी, जिसमें शामिल हैं:
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हवाईअड्डे: पटना का जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा और आगामी बिहटा हवाईअड्डा।
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रेलवे नेटवर्क: सासाराम, आरा, दानापुर और पटना के प्रमुख रेलवे स्टेशन।
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जल परिवहन: पटना इनलैंड वॉटर टर्मिनल।
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पटना रिंग रोड: जिससे यातायात प्रवाह बेहतर होगा और माल परिवहन तेज होगा।
पटना-आरा-सासाराम कॉरिडोर के निर्माण से न केवल बिहार में यातायात सुगम होगा, बल्कि लखनऊ, पटना, रांची और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों के बीच संपर्क भी मजबूत होगा। इस परियोजना के तहत 48 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से फायदा होगा।
यह परियोजना मोदी सरकार की आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत बुनियादी ढांचे के विस्तार, रोजगार सृजन और सामाजिक-आर्थिक विकास के उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पटना-सासाराम कॉरिडोर न केवल बिहार की अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि क्षेत्रीय संतुलित विकास को भी बढ़ावा देगा।

