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लखानी ग्रुप : 162 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया एंटी-करप्शन एजेंसियों ने लखानी ग्रुप के प्रमोटर्स पर सख्त कार्यवाही की

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,2 अप्रैल।
भारत में बड़े-बड़े व्यापारियों पर निगरानी रखने वाली एजेंसियों ने आज लखानी समूह पर कठोर कार्यवाही की है। यह कार्रवाई उस समय पर की गई जब यह प्रमाणित हुआ कि इस समूह के प्रमोटर्स ने भारतीय बैंकों से कर्ज के पैसे लिए गए, उनका गलत इस्तेमाल किया है और इसके साथ ही धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की जाँच की जा रही है। लखानी समूह के प्रमोटर्स पीडी लखानी और सुमन लखानी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन दोनों पर भारतीय बैंकों से ₹162 करोड़ का कर्ज लेकर उसे अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और पुराने कर्ज चुकाने में उपयोग करने का आरोप है।

लखानी ग्रुप के प्रमोटर्स ने भारतीय ओवरसीज बैंक, पंजाब नेशनल बैंंक और इलाहाबाद बैंक से करोड़ों रुपया का कर्ज लिया था। आरोप है कि इन पैसों का इस्तेमाल समूह के बिजनेस के बजाय व्यक्तिगत लाभों और अन्य कंपनियों के कर्ज चुकाने के लिए किया गया। इसके अलावा, इस पैसे का इस्तेमाल लखानी के व्यक्तिगत संपत्ति बनाने और अन्य निजी व्ययों में किया गया।

इन आरोपों पर आधारित प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में 110 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को अटैच किया है। अब इस मामले की जांच सीबीआई और अन्य एजेंसियां करती हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने इस केस में लखानी समूह की कमर्शल प्रॉपर्टीज को सीज किया है। दिल्ली-एनसीआर में लखानी समूह की 20 एकड़ से अधिक कमर्शल प्रॉपर्टीज और 30 एकड़ जमीन की जाँच की जा रही है। यह कार्रवाई विभिन्न बैंकों द्वारा किए गए आरोपों के बाद की गई है, जिनसे लखानी समूह ने धोखाधड़ी की थी।

सभी आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है और उन्हें कठोर सजा का सामना करना पड़ सकता है।

यह मामला समाज में विश्वास का संकट पैदा करता है क्योंकि लखानी समूह एक प्रसिद्ध नाम है और वर्षों से भारतीय बाजार में अपने पउत्पाद बेच रहा था। कई लोग यह मानते थे कि यह एक भरोसेमंद कंपनी है, लेकिन अब सामने आ रहा है कि इस समूह ने लोन का गलत इस्तेमाल किया है और कई बैंकों को चूना लगाया है।

इस केस ने यह साबित कर दिया है कि इस देश को धोखा देने के अलावा बड़े और पुरानी कंपनियाँ और कुछ नहीं कर रही हैं और उनकी आर्थिक गतिविधियाँ संदिग्ध हैं।

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