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“पानी नहीं अब पलटवार!” — भारत ने औपचारिक रूप से तोड़ा सिंधु जल समझौता, पाकिस्तान को भेजा कड़ा संदेश

Jammu, India - September 26 : Indian Border Security Force (BSF) soldiers patrol on a boat in Out Post (OP)Chenab along the Pargwal area of India-Pakistan international border in Akhnoor about 70 km from Jammu, on Monday, September 26, 2016. The neighbors have fought two wars since 1947 over their competing claims to the Himalayan region of Kashmir. Taking stock of the 56-year old Indus Water Treaty with Pakistan here on Monday, Prime Minister Narendra Modi said: "Blood and water cannot flow at the same time."India would expedite construction on three dams on the Chenab River, named Pakul Dul, Sawalkot and Bursar, the decision came at the meeting chaired by Prime Minister modi in the backdrop of the Uri terror attack last week.(Photo by Nitin Kanotra / Hindustan Times)

नई दिल्ली, 25 अप्रैल — भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर इतिहास बदल दिया है। 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ यह समझौता, जो भारत-पाक रिश्तों की एकमात्र “अविनाशी डोर” माना जाता था, अब आधिकारिक रूप से निलंबित कर दिया गया है।

सरकार की ओर से जल शक्ति सचिव देबाश्री मुखर्जी ने पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तज़ा को एक तीखे लहजे वाला पत्र भेजकर इस निर्णायक फैसले की सूचना दी।

भारत ने संधि को निलंबित करने की ठोस वजहें गिनाईं:

पत्र में साफ लिखा गया:

“पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति ने भारत को अपने वैध अधिकारों का पूर्ण उपयोग करने से रोका है। समझौते की भावना और शब्द दोनों का उल्लंघन किया गया है।”

भारत ने पहले भी सिंधु संधि के अनुच्छेद XII(3) के तहत संशोधन की मांग की थी, पर पाकिस्तान ने किसी भी संवाद से इन्कार किया। जब आतंकवाद के खून से नदियां लाल हो रही हों, तब पानी की साझेदारी कैसी?

यह केवल एक जल संधि का निलंबन नहीं है, यह एक रणनीतिक पलटवार है — भारत का संदेश अब बिल्कुल साफ है:

“कूटनीति वह तब तक ही चलेगी जब तक उसमें आपसी सम्मान और जवाबदेही हो।”

अब इस रेखा पर भारत ने निर्णायक लकीर खींच दी है।

इस कदम से जहां इस्लामाबाद में खलबली मच गई है, वहीं भारत में इसे “साहसी और समयोचित कदम” माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दक्षिण एशिया की कूटनीति को नई दिशा दे सकता है।

“पानी की हर बूंद अब राष्ट्रहित में होगी। और जो देश हमारे सैनिकों पर गोली चलाएगा, उसे अब हमारी नदियां नहीं बहेंगी!”

यह केवल नीतिगत निर्णय नहीं — यह भारत की आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और संप्रभुता का उद्घोष है।

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