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बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल: विश्व बैंक ने चेताया, 36 वर्षों में सबसे धीमी विकास दर, 30 लाख लोग और डूबेंगे गरीबी में

नई दिल्ली। पड़ोसी देशों में बढ़ते राजनीतिक और आर्थिक संकटों के बीच एक और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था इस साल 36 वर्षों में सबसे कमजोर स्थिति में पहुंच सकती है। आर्थिक विकास दर में भारी गिरावट के साथ देश में गरीबी का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ने की आशंका है।

रिपोर्ट के अनुसार, यूएनस प्रशासन के कार्यकाल में श्रम बाजार की कमजोर हालत और लगातार घटती वास्तविक मजदूरी ने आम बांग्लादेशी को गहरे आर्थिक संकट में धकेल दिया है। लोग काम तो कर रहे हैं, लेकिन वेतन इतना कम है कि जीवन यापन मुश्किल हो रहा है।

विश्व बैंक की “बांग्लादेश डेवलपमेंट अपडेट” में यह भी बताया गया है कि आर्थिक गतिविधियों की सुस्ती का सीधा असर गरीब तबकों पर पड़ रहा है। इससे न केवल गरीबी बढ़ रही है, बल्कि आर्थिक असमानता भी भयावह रूप ले रही है।

इस बीच विश्व बैंक की एक और रिपोर्ट ने पाकिस्तान की हालत को लेकर भी गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान में 1 करोड़ से अधिक लोग भयंकर खाद्य संकट का सामना कर सकते हैं।

दक्षिण एशिया के ये दो बड़े देश—बांग्लादेश और पाकिस्तान—गंभीर आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहे हैं। जहां एक ओर भूख और गरीबी बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक संस्थाएं भी चेतावनी दे रही हैं कि अगर जल्द कोई ठोस नीति नहीं अपनाई गई, तो इन देशों की जनता को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

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