यह वही केस है जिसने सालों पहले मनोरंजन जगत में तहलका मचा दिया था। फिल्म की शूटिंग के दौरान एक महिला क्रू मेंबर ने विजय राज पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। मामला तूल पकड़ गया था और सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों तक, हर जगह विजय राज को कठघरे में खड़ा कर दिया गया था।
विजय राज, जिन्हें ‘रन’, ‘धमाल’, ‘धक्का स्टार’, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ जैसी फिल्मों में उनकी दमदार अदाकारी के लिए जाना जाता है, अचानक एक ऐसे विवाद में फंसे थे जिसने उनकी पूरी छवि पर सवालिया निशान लगा दिए थे। बिना सबूतों की पुष्टि के, उन्हें कई प्रोजेक्ट्स से हाथ धोना पड़ा। उनके किरदारों पर कैंची चलने लगी और फिल्मी गलियारों में उनके खिलाफ कानाफूसी शुरू हो गई थी।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान जो सबूत और गवाह पेश किए गए, उनमें स्पष्ट रूप से कोई ठोस आधार नहीं मिला कि विजय राज ने किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार किया हो। अदालत ने पाया कि आरोप मनगढ़ंत और संदेहास्पद थे। इसके साथ ही विजय राज को पूरे सम्मान के साथ बरी कर दिया गया।
क्लीनचिट मिलने के बाद विजय राज ने भावुक होकर कहा, “मेरे खिलाफ जो आरोप लगाए गए, उन्होंने मुझे अंदर तक तोड़ दिया था। पर मुझे अपनी सच्चाई पर भरोसा था। आज कानून ने भी मेरी सच्चाई पर मुहर लगा दी है।”
विजय राज का मामला एक बार फिर ये सवाल उठाता है कि क्या #MeToo जैसी मुहिम का दुरुपयोग हो रहा है? क्या सिर्फ किसी के आरोप लगाने भर से किसी का करियर तबाह कर देना न्याय है? ये चिंतन का विषय है।
इस फैसले से न सिर्फ विजय राज, बल्कि उनके चाहने वालों और फिल्म इंडस्ट्री के कई लोगों ने राहत की सांस ली है। अब वे दोबारा अपने अधूरे प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू कर सकते हैं और एक बार फिर सिल्वर स्क्रीन पर अपने अनोखे अंदाज में वापसी कर सकते हैं।
जिस कलाकार ने अपनी जिंदगी अभिनय के हर रंग में डूबकर जी, उसी की छवि को बिना पूरी पड़ताल के रौंद दिया गया। लेकिन कहते हैं न – सच चाहे जितना भी दबाया जाए, एक दिन सामने आ ही जाता है। विजय राज की क्लीनचिट यही साबित करती है। अब देखना ये है कि क्या बॉलीवुड उन्हें खुले दिल से अपनाता है या बदनामी का ये धुंधलका उनके चारों ओर बना रहेगा?