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  || स्वयं से स्वयंभू का मार्ग || 

  || स्वयं से स्वयंभू का मार्ग || 

                                                                                                    आज का भगवद् चिंतन

                        सब को जानो पर साथ ही साथ स्वयं को भी जानो, सबको खोजो पर साथ ही साथ स्वयं की भी खोज करो और सबके निकट रहो पर साथ ही साथ स्वयं के निकट भी पहुँचो। स्वयं से स्वयं की दूरी ही दुनिया की सबसे बड़ी दूरी है, जिसे पूरी करने में कभी-कभी जन्म जन्मांतरों के चक्कर लग जाते हैं। स्वयं तक पहुँचे बिना जीवन यात्रा का विराम भी नहीं हो सकता है। 

                        जीवन भर बाहर की बहुत यात्राएँ  हुई अब भीतर के यात्री भी बनो। भीतर की यात्रा सुखद तो बहुत है लेकिन सहज कदापि नहीं। बहुत कठिन है स्वयं से बातें कर पाना, बहुत कठिन है स्वयं की बातों को सुन पाना और बहुत कठिन है स्वयं को मित्र बनाकर स्वयं में आनंदित रहना। सब करो पर कुछ क्षण स्वयं के साथ भी अवश्य व्यतीत करो। स्वयं की खोज ही स्वयंभू बनने का मार्ग भी है ।

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