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नैनीताल में डेमोग्राफी चेंज का मामला , अवैध मस्जिद-मदरसे पर सीएम पोर्टल पर शिकायत

नैनीताल के चौंसला गाँव में डेमोग्राफी चेंज का मामला गर्माया, अवैध मस्जिद-मदरसे पर सीएम पोर्टल पर शिकायतनैनीताल (उत्तराखंड):

समग्र समाचार सेवा 
(उत्तराखंड): नैनीताल ,27 मई –उत्तराखंड के शांत और सुरम्य जिले नैनीताल में स्थित कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र का चौंसला गागाँव  इन दिनों एक गंभीर मुद्दे को लेकर चर्चा में है — डेमोग्राफी चेंज और अवैध धार्मिक संरचनाओं के निर्माण का मामला। गांव में बाहरी मुस्लिम लोगों द्वारा ज़मीन की खरीद और अवैध मस्जिद-मदरसे के निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया है।

क्या है मामला?
स्थानीय निवासियों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि चौंसला गांव में योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा कृषि भूमि खरीदी जा रही है, और वहां बाहर से लोगों को बसाया जा रहा है। इससे गांव की जनसांख्यिकीय संरचना (Demographic Structure) में अचानक बदलाव आ रहा है। इसके साथ ही एक अवैध मस्जिद और मदरसा का निर्माण भी किया गया है, जो भूमि उपयोग और ग्राम पंचायत की अनुमति के बिना किया गया है।

प्रशासन ने की जांच शुरू:
सीएम पोर्टल पर शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने हरकत में आते हुए राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस को जांच के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि जिस भूमि पर मस्जिद और मदरसा बना है, वह राजस्व अभिलेखों में कृषि भूमि के रूप में दर्ज है। ऐसे में बिना भूमि उपयोग परिवर्तन (Land Use Conversion) के इस प्रकार का निर्माण स्पष्ट रूप से अवैध माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों  में आक्रोश:
गांव के स्थानीय लोगों में इस घटनाक्रम को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यह मामला केवल अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक संतुलन को बिगाड़ने की सुनियोजित साजिश है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं और पहचान पत्रों के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बाहर से आए लोग यहां बस रहे हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया:
मामला सामने आने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी चिंता व्यक्त की है। कुछ नेताओं ने मांग की है कि राज्य सरकार इस पर सख्त कार्रवाई करते हुए ऐसे अवैध कब्जों को तुरंत हटाए और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। साथ ही पूरे जिले में इस प्रकार की गतिविधियों की सर्वे और निगरानी की मांग की जा रही है।

बड़ा सवाल: क्या यह सुनियोजित जनसंख्या घुसपैठ है?
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती राज्यों में ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जहां धर्म के नाम पर जमीन खरीदकर जनसंख्या का संतुलन बदला जा रहा है। उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में इस तरह के प्रयास राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा हो सकते हैं।

चौंसला गांव का मामला उत्तराखंड में पहली बार सामने आया ऐसा उदाहरण नहीं है। इससे पहले भी सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने के आरोप लग चुके हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और राज्य सरकार इस मामले पर कितनी तेज़ और प्रभावी कार्रवाई करती है। क्योंकि यहां सवाल केवल एक मस्जिद या मदरसे का नहीं, बल्कि पूरे राज्य की सामाजिक संरचना का है।

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