Site icon Samagra Bharat News website

IPS गौरव उपाध्याय पर POCSO कोर्ट में आरोप तय: क्या है पूरा मामला?

समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, 22 जून: असम कैडर के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी गौरव उपाध्याय पर यौन उत्पीड़न के एक पुराने मामले में कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है। कार्बी आंगलोंग जिले की पॉक्सो (POCSO) अदालत ने छह साल पुराने इस संवेदनशील प्रकरण में उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। यह मामला एक नाबालिग बच्ची से जुड़ा है, और अदालत के इस कदम के बाद अब मामले की सुनवाई शुरू होगी।

क्या है पूरा आरोप?

विशेष न्यायाधीश आर. लाल की अदालत में चल रहे इस मामले में आरोप है कि वर्ष 2019 में तत्कालीन एसपी गौरव उपाध्याय ने दो अलग-अलग स्थानों पर एक नाबालिग बच्ची के साथ अनुचित व्यवहार किया। घटनाएँ उस समय की बताई जा रही हैं जब उपाध्याय कार्बी आंगलोंग जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे।

घटनाओं का विवरण

चार्जशीट के अनुसार, पीड़िता की मां, जो खुद भी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं, दिसंबर 2019 में अपने बच्चों के साथ दीफू में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने आई थीं। कार्यक्रम के बाद, आरोपी गौरव उपाध्याय ने परिवार को अपना कार्यालय भवन दिखाने के लिए बुलाया।

इसी दौरान कथित तौर पर पहली घटना घटी, जब आरोपी ने बच्ची के साथ अनुचित व्यवहार किया। दूसरी घटना एक होटल के कमरे में बताई गई है, जहां सभी रुके हुए थे। चार्जशीट के मुताबिक, वहां भी आरोपी ने बच्ची के साथ अनुचित हरकत की, जिसका पता बाद में बच्ची की मां को चला।

CID जांच और मानसिक प्रभाव

इस मामले की शिकायत जनवरी 2020 में गुवाहाटी के एक महिला थाने में दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद इसे असम सीआईडी को सौंपा गया। गहन जांच के बाद, आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि पीड़िता की मनोवैज्ञानिक जांच में पाया गया कि इस घटना के बाद वह तनाव और अवसाद से ग्रस्त रही है। यह बच्चों पर ऐसे अपराधों के गंभीर मानसिक प्रभावों को उजागर करता है।

कौन हैं आईपीएस गौरव उपाध्याय?

आईपीएस गौरव उपाध्याय 2012 बैच के अधिकारी हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में असम राज्य परिवहन विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर तैनात हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी पर ऐसे गंभीर आरोप निश्चित रूप से प्रशासनिक व्यवस्था की साख को झकझोरते हैं। न्यायिक प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि यह संवेदनशील मामला कानूनी कसौटी पर कितना खरा उतरता है।

Exit mobile version