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महाराष्ट्र के कृषि मंत्री नए विवादों में: रमी खेलने से लेकर ‘सरकार भिखारी’ बयान तक

समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 22 जुलाई 2025: महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे एक बार फिर नए विवादों के घेरे में आ गए हैं। इस बार उनका बयान, जिसमें उन्होंने कहा कि “सरकार खुद भिखारी है”, मीडिया और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस का विषय बन गया है। यह टिप्पणी उन्होंने तब की जब पत्रकारों ने उनसे किसानों को लेकर उनके पिछले कुछ विवादास्पद बयानों के बारे में सवाल पूछे। कोकाटे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वह पहले से ही महाराष्ट्र विधानसभा सत्र के दौरान अपने मोबाइल फोन पर ऑनलाइन रमी गेम खेलने को लेकर आलोचना का सामना कर रहे हैं।

विधानसभा में रमी खेलने का मामला

कुछ समय पहले, माणिकराव कोकाटे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा की कार्यवाही के दौरान अपने मोबाइल फोन पर ‘जंगली रमी’ (Junglee Rummy) खेलते हुए देखा जा रहा था। इस वीडियो के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए उन पर सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया था। हालांकि, मंत्री कोकाटे ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया था कि वह केवल एक पॉप-अप गेम को बंद करने की कोशिश कर रहे थे और उन्हें रमी खेलना नहीं आता। उन्होंने यह भी धमकी दी थी कि जो लोग उन्हें बदनाम करने के लिए अधूरे वीडियो जारी कर रहे हैं, उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। उन्होंने कहा था कि अगर वीडियो सही साबित हुआ तो वह इस्तीफा दे देंगे।

‘सरकार खुद भिखारी’ वाला बयान और इसकी प्रतिक्रिया

हाल ही में, पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब कोकाटे से किसानों के मुद्दों पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “सरकार खुद भिखारी है।” यह बयान उनकी पिछली विवादास्पद टिप्पणी की ही एक कड़ी है। इस बयान पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसे “अनुचित” बताया। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने इस बयान को महाराष्ट्र की जनता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों का अपमान करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक मंत्री सरकार को ‘भिखारी’ कह रहा है।

विवादों का पुराना नाता

यह पहली बार नहीं है जब माणिकराव कोकाटे विवादों में फंसे हैं। अप्रैल में भी, उन्होंने एक और विवादास्पद बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कुछ किसानों पर सरकारी सहायता का दुरुपयोग शादी-ब्याह और सगाई जैसे कार्यों के लिए करने का आरोप लगाया था। इस बयान के बाद भी उन्हें चौतरफा आलोचना का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी थी। उनके ऐसे लगातार विवादास्पद बयानों और हरकतों से सरकार की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और विपक्ष को हमला करने का मौका मिल रहा है।

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