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ईडी बदमाशों की तरह काम नहीं कर सकती: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 8 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कामकाज पर एक बार फिर तीखी टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कहा है कि ईडी को कानून के दायरे में रहकर काम करना होगा और वह ‘बदमाशों की तरह’ व्यवहार नहीं कर सकती। कोर्ट की यह टिप्पणी ईडी द्वारा दर्ज मामलों में अत्यंत कम दोषसिद्धि दर को लेकर आई है, जिससे एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

यह टिप्पणी जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की तीन सदस्यीय पीठ ने की, जो जुलाई 2022 में दिए गए उस ऐतिहासिक निर्णय के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पीएमएलए (धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002) के तहत ईडी को दी गई व्यापक शक्तियों को बरकरार रखा गया था।

दोषसिद्धि की दर 0.5% से भी कम

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की कि केंद्रीय एजेंसी द्वारा 5000 से अधिक मामलों की जांच के बावजूद, दोषसिद्धि केवल 10 से भी कम मामलों में हुई है। अदालत ने संसद में एक केंद्रीय मंत्री के दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की स्थिति ईडी की साख को प्रभावित करती है और यह बताती है कि एजेंसी का इस्तेमाल किस प्रकार किया जा रहा है।

जस्टिस सूर्यकांत ने तीखे लहजे में कहा, “ईडी को ऐसा नहीं लगना चाहिए कि वह कानून से ऊपर है। किसी भी सशक्त एजेंसी को कानून के तहत जवाबदेह रहना चाहिए।”

प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट’ (ECIR) को लेकर विवाद

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस.वी. राजू ने दलील दी कि ईडी किसी भी आरोपी को ECIR की कॉपी देने के लिए बाध्य नहीं है। उन्होंने इसे एक आंतरिक दस्तावेज बताया और कहा कि कई मामलों में मुख्य आरोपी ऐसे देशों में भाग जाते हैं, जिनसे प्रत्यर्पण कठिन होता है—जैसे कि छोटे द्वीपीय देश—जिससे जांच में बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
न्यायपालिका की चेतावनी

हालांकि पीठ इस तर्क से संतुष्ट नहीं दिखी और कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही के बिना किसी भी जांच एजेंसी की शक्तियाँ खतरनाक हो सकती हैं। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि दोषसिद्धि दर में सुधार नहीं हुआ, तो कानून की समीक्षा की आवश्यकता पड़ सकती है।

ईडी की जांच शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी केवल एक कानूनी बहस नहीं, बल्कि एक गहरी संस्थागत चेतावनी है। हाल के वर्षों में ईडी पर सत्ता के इशारे पर काम करने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी आने वाले समय में ईडी की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गहरे प्रभाव डाल सकती है।

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