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पूर्व पेंटागन अधिकारी ने असीम मुनीर को बताया ‘सूट में ओसामा बिन लादेन’

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 12 अगस्त, 2025 – पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर का हालिया अमेरिका दौरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है। मुनीर द्वारा भारत के खिलाफ परमाणु हमले की दी गई धमकी पर पेंटागन के एक पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। रुबिन ने मुनीर की तुलना कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन से करते हुए उन्हें ‘वर्दी में ओसामा बिन लादेन’ बताया, जिससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है।

क्यों दिया गया है यह विवादित बयान?

पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें मुनीर ने कथित तौर पर कहा था, “अगर पाकिस्तान डूबता है, तो वह आधी दुनिया को भी अपने साथ ले डूबेगा।” मुनीर के इस बयान को भारत के खिलाफ एक अप्रत्यक्ष परमाणु धमकी के रूप में देखा जा रहा है। रुबिन ने मुनीर की इस टिप्पणी को ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा कि यह बयान ओसामा बिन लादेन के सिद्धांतों की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि एक सैन्य प्रमुख का इस तरह का बयान देना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है, खासकर तब, जब पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है।

पाकिस्तान की दोहरी नीति पर सवाल

माइकल रुबिन ने सिर्फ मुनीर के बयान की आलोचना ही नहीं की, बल्कि पाकिस्तान की दोहरी नीतियों पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद को प्रायोजित करने का आरोप लगाया और कहा कि पाकिस्तान ने एक वैध राज्य होने का अपना अधिकार खो दिया है। रुबिन ने सुझाव दिया कि अमेरिका को पाकिस्तान को उन देशों की सूची में डाल देना चाहिए जो आतंकवाद को प्रायोजित करते हैं। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिकी सरकार से मुनीर को अमेरिका में अवांछित व्यक्ति (persona non grata) घोषित करने की मांग भी की।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि

पाकिस्तान हमेशा से ही आतंकवाद को लेकर दोहरी नीति अपनाता रहा है। एक तरफ वह वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर उसकी जमीन पर आतंकवादी संगठनों को पनाह मिलती रही है। मुनीर के इस विवादित बयान और उस पर पूर्व अमेरिकी अधिकारी की तीखी प्रतिक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में पाकिस्तान की विश्वसनीयता को और भी कम कर दिया है। यह घटना दर्शाती है कि पाकिस्तान की परमाणु धमकी और आतंकवाद के प्रति उसकी नीति को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धैर्य खत्म हो रहा है।

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