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सीएम मोहन यादव ने अमित शाह से मिलकर MP के लिए रखा 25% डेयरी उत्पादन का टारगेट

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 12 अगस्त – मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान, मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश के विकास से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और राज्य में चल रहे कार्यों की प्रगति से गृह मंत्री को अवगत कराया। यह मुलाकात मुख्य रूप से मध्य प्रदेश को देश की डेयरी कैपिटल बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर केंद्रित थी, जिसके तहत राज्य ने देश के कुल डेयरी उत्पादन में अपनी हिस्सेदारी को 9% से बढ़ाकर 25% तक करने का लक्ष्य रखा है।

मुलाकात का मकसद और मुख्य बिंदु

सीएम मोहन यादव और गृह मंत्री अमित शाह के बीच हुई यह मुलाकात कई मायनों में महत्वपूर्ण थी। मुख्यमंत्री ने अमित शाह को राज्य में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों की प्रगति और सहकारिता क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश नए कानूनों को लागू करने में अग्रणी राज्य बन गया है और लगातार नए-नए प्रयोगों के माध्यम से सुशासन के नए मानक स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को उनके मार्गदर्शन और सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।

कैसे हासिल होगा 25% का लक्ष्य?

वर्तमान में, मध्य प्रदेश का देश के कुल दूध उत्पादन में 9% का योगदान है। इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 25% तक करना एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य है, जिसके लिए राज्य सरकार ने एक ठोस योजना तैयार की है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और प्रसंस्करण से संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। किसानों को डेयरी फार्मिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जाएगा। राज्य में दुग्ध सहकारी समितियों को मजबूत कर दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार किया जाएगा, ताकि मध्य प्रदेश को वास्तव में देश की डेयरी कैपिटल बनाया जा सके।

मध्य प्रदेश में डेयरी उद्योग की क्षमता

मध्य प्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और जलवायु के कारण डेयरी उद्योग के लिए एक आदर्श राज्य है। राज्य में पशुधन की बड़ी संख्या है, और कृषि भी अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री का यह लक्ष्य राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दे सकता है, जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह कदम केंद्र सरकार के सहकार से समृद्धि के विजन के अनुरूप भी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

 

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