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बिहार की सियासत में भूचाल: तेजस्वी यादव ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

समग्र समाचार सेवा
पटना, 17 अगस्त, 2025: लोकसभा चुनाव के बाद से बिहार की राजनीति में लगातार उबाल दिख रहा है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने ‘वोट अधिकार यात्रा’ निकालकर बिहार की जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश की है। इस यात्रा के दौरान तेजस्वी ने सासाराम में एक जनसभा को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधा। तेजस्वी का आरोप है कि केंद्र सरकार और भाजपा बिहारियों के साथ धोखा करना चाहती है और मतदाता सूची से नाम हटाकर लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश कर रही है।

65 लाख नाम क्यों हटाए गए?

अपनी जनसभा में तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में मतदाता सूची से 65 लाख से ज्यादा लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या की एक बड़ी साजिश करार दिया। तेजस्वी ने कहा कि जो लोग जीवित हैं, उनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जबकि जो लोग गुजर चुके हैं, उनके नाम अभी भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यह एक ‘सुविचारित साजिश’ है, जिसका मकसद बिहार में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करना है। तेजस्वी ने चेतावनी दी कि अगर लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, तो उन्हें पेंशन और राशन जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाएगा।

‘खैनी में चूना’ मुहावरे का इस्तेमाल

जनसभा के दौरान तेजस्वी यादव ने एक प्रचलित मुहावरे का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “मोदी जी बिहारियों को धोखा देना चाहते हैं। लेकिन वह नहीं जानते कि बिहार में खैनी में चूना रगड़ा जाता है।” इस मुहावरे का प्रयोग करते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बिहारी लोग बहुत समझदार हैं और उन्हें आसानी से बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। उनका यह बयान एक तरह से बिहार के लोगों की राजनीतिक समझ और जागरूकता की तारीफ थी, और भाजपा के दावों को झूठा साबित करने का प्रयास था।

चुनाव आयोग पर भी सवाल

तेजस्वी यादव ने सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी पर ही नहीं, बल्कि चुनाव आयोग पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग प्रधानमंत्री के इशारे पर काम कर रहा है। तेजस्वी ने कहा कि जब उनकी पार्टी ने मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत की थी, तो चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि आयोग को निष्पक्ष रहकर काम करना चाहिए, न कि किसी एक पार्टी के हित में।

‘लोकतंत्र बचाने’ की लड़ाई

तेजस्वी ने अपनी ‘वोट अधिकार यात्रा’ को केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि उनका मकसद हर बिहारी के वोट के अधिकार की रक्षा करना है। तेजस्वी ने जनता से अपील की कि वे एकजुट रहें और सरकार की चालबाजी को पहचानें। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी या उनकी पार्टी की नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की है जो अपने लोकतांत्रिक अधिकारों को सुरक्षित रखना चाहता है।

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