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‘साड़ी में शशि थरूर’ पर प्रियंका चतुर्वेदी का करारा जवाब

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 19 अगस्त, 2025: सोशल मीडिया की दुनिया में कब क्या वायरल हो जाए, कोई नहीं जानता। हाल ही में कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर की एक तस्वीर इंटरनेट पर काफी चर्चा में रही। इस तस्वीर में शशि थरूर किसी कार्यक्रम में एक महिला के साथ खड़े थे, और दोनों ने पारंपरिक पोशाक पहनी हुई थी। हालांकि, एक सोशल मीडिया यूजर ने इस तस्वीर पर एक भद्दी और लैंगिक टिप्पणी करते हुए लिखा, “साड़ी में शशि थरूर”। इस टिप्पणी का मकसद संभवतः शशि थरूर को उनके पहनावे को लेकर शर्मिंदा करना था, लेकिन इसका उल्टा असर हुआ।

प्रियंका चतुर्वेदी ने दिया करारा जवाब

शिवसेना (यूबीटी) सांसद और तेज-तर्रार नेता प्रियंका चतुर्वेदी की नजर इस टिप्पणी पर पड़ी। अपनी हाजिरजवाबी और तीखे बयानों के लिए मशहूर प्रियंका ने तुरंत इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस टिप्पणी का जवाब देते हुए लिखा, “क्या शानदार टिप्पणी है! और उन्होंने इसे आपसे बेहतर पहना है।” प्रियंका चतुर्वेदी का यह जवाब तुरंत वायरल हो गया। उन्होंने न सिर्फ उस यूजर को चुप कराया, बल्कि शशि थरूर का बचाव भी किया और इस तरह की ट्रोलिंग को गलत ठहराया। उनके जवाब को सैकड़ों लोगों ने रीट्वीट और लाइक किया, और लोगों ने उनके साहस और हाजिरजवाबी की तारीफ की।

सोशल मीडिया पर क्यों बढ़ रही है ट्रोलिंग?

यह घटना भारतीय राजनीति में सोशल मीडिया पर बढ़ती ट्रोलिंग की प्रवृत्ति को भी दर्शाती है। राजनेताओं को अक्सर उनके पहनावे, भाषा या निजी जीवन पर निशाना बनाया जाता है। महिलाओं को तो खास तौर पर उनके कपड़ों और रंगरूप के लिए ट्रोल किया जाता है। लेकिन प्रियंका चतुर्वेदी जैसी महिला नेता अब इन ट्रोलर्स को जवाब देना सीख गई हैं और उन्हें उनकी ही भाषा में करारा जवाब देती हैं। यह एक सकारात्मक बदलाव है, जहां नेता चुप रहने के बजाय ऐसी मानसिकता का विरोध कर रहे हैं।

‘ट्रोल’ संस्कृति पर तीखी बहस

प्रियंका चतुर्वेदी के जवाब ने ‘ट्रोल’ संस्कृति पर एक नई बहस छेड़ दी है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इस तरह के व्यवहार की निंदा की, जबकि कुछ ने इस बात पर जोर दिया कि नेताओं को इस तरह की टिप्पणियों को नजरअंदाज करना चाहिए। हालांकि, प्रियंका चतुर्वेदी का मानना है कि इस तरह के व्यवहार को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति का पहनावा उसके व्यक्तित्व का मापदंड नहीं हो सकता।

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