Site icon Samagra Bharat News website

(SCO) शिखर सम्मेलन : चीन में शी जिनपिंग का ‘पोस्ट-अमेरिकन’ मंच

(SCO) शिखर सम्मेलन : चीन में शी जिनपिंग का ‘पोस्ट-अमेरिकन’ मंच

समग्र समाचार सेवा
बीजिंग, 26 अगस्त – अगले हफ्ते जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तियानजिन पहुंचेंगे, जहां उनका स्वागत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन करेंगे, तब दुनिया एक ऐसे मंच को देखेगी जिसे बीजिंग अमेरिकी नेतृत्व वाले वैश्विक ढांचे के लिए सीधी चुनौती के रूप में पेश करना चाहता है।

यह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन 20 से अधिक विश्व नेताओं को एकत्र करेगा। इसमें मध्य एशिया, दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे। चीन के लिए यह केवल सम्मेलन नहीं बल्कि एक नाटकीय दृश्य है – ग्लोबल साउथ की एकजुटता का प्रदर्शन, विशेषकर उस समय जब डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अस्थिरता बढ़ा दी है।

शी जिनपिंग का ‘ग्लोबल साउथ’ क्षण

2001 में स्थापित SCO का दायरा अब सुरक्षा से आगे बढ़कर अर्थव्यवस्था, जलवायु और रक्षा सहयोग तक फैल चुका है। परंतु इस बार का सम्मेलन वास्तविक समझौतों से अधिक प्रतीकों पर केंद्रित है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शी जिनपिंग इस मंच का उपयोग यह दिखाने के लिए करेंगे कि “अमेरिका के बाद की विश्व व्यवस्था कैसी दिख सकती है।”

मोदी का नाज़ुक संतुलन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए यह महज प्रतीकात्मक यात्रा नहीं है। सात साल बाद उनका पहला चीन दौरा है, जब 2020 की सीमा झड़पों ने दोनों देशों के रिश्तों को तोड़ दिया था। अब, जब अमेरिका ने भारत पर नए शुल्क लगाए हैं, जिससे 87 अरब डॉलर का निर्यात बाजार प्रभावित हो सकता है, नई दिल्ली बीजिंग से संबंधों को सुधारने की ओर बढ़ सकती है।
संभावना है कि मोदी-शी मुलाकात में सीमा से सैनिकों की आंशिक वापसी, व्यापारिक प्रतिबंधों में ढील, वीजा नीतियों में नरमी और जलवायु सहयोग जैसे छोटे लेकिन अहम कदमों पर चर्चा हो।

पुतिन की कूटनीतिक जीवनरेखा

व्लादिमीर पुतिन के लिए यह सम्मेलन राजनीतिक वैधता पाने का अवसर है। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी दुनिया से अलग-थलग पड़े पुतिन लगातार BRICS और SCO जैसे मंचों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहे हैं। तियानजिन में मोदी और शी के साथ खड़े होकर वह यह संदेश देंगे कि रूस अब भी वैश्विक राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।

SCO की धुंधली वास्तविकता

हालांकि SCO की बढ़ती ताक़त के बावजूद इसके ठोस नतीजे अक्सर सीमित रहे हैं। आंतरिक मतभेदों के कारण संगठन कई बार ठप हो जाता है। उदाहरण के लिए, हाल ही में भारत ने कश्मीर हमले का जिक्र न होने पर संयुक्त बयान से इनकार कर दिया था। फिर भी, चीन के लिए इसकी ताक़त ‘ऑप्टिक्स’ यानी दृश्यात्मक शक्ति में है।

बड़ा संदेश

तियानजिन सम्मेलन से ठोस आर्थिक या सुरक्षा समझौते भले न निकलें, परंतु तस्वीर बेहद मजबूत होगी – चीन, भारत और रूस एक साथ खड़े नज़र आएंगे।
यह संदेश पूरी दुनिया को यही देगा कि अब विश्व व्यवस्था एकध्रुवीय नहीं रही। शी के लिए यह अमेरिका को चुनौती देने का क्षण है, पुतिन के लिए अस्तित्व का सहारा और मोदी के लिए संतुलन साधने का अवसर।

अर्थात, तियानजिन में असली खेल ‘ऑप्टिक्स’ का है – और शी जिनपिंग इस मंच पर दुनिया को एकता का यही शक्तिशाली चित्र दिखाना चाहते हैं।

Exit mobile version