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सीपी राधाकृष्णन बने भारत के नए उपराष्ट्रपति, विपक्षी खेमे में हुई क्रॉस वोटिंग

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 9 सितंबर 2025: महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल और एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को भारत का नया उपराष्ट्रपति चुना गया है। उन्होंने आज हुए चुनाव में विपक्षी इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को 150 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया है। 68 वर्षीय राधाकृष्णन को कुल 452 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी रेड्डी को 300 वोटों से संतोष करना पड़ा। इस जीत के साथ ही राधाकृष्णन निवर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का स्थान लेंगे।

आज संसद भवन में भारत के 17वें उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान हुआ। कुल 781 सांसदों में से 754 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिसमें से 15 वोटों को अमान्य घोषित कर दिया गया। चुनाव परिणाम आते ही एनडीए खेमे में जश्न का माहौल बन गया। इस जीत ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की एकजुटता और मजबूत स्थिति को एक बार फिर साबित कर दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग ने विपक्ष की एकजुटता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एनडीए और उसके घोषित सहयोगियों के पास कुल 438 सांसद थे, लेकिन राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कम से कम 14 विपक्षी सांसदों ने पाला बदला और एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। वहीं, इंडिया गठबंधन के पास 315 सांसदों का संख्याबल होने के बावजूद उनके उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को केवल 300 वोट मिले। 15 वोटों का अमान्य होना भी विपक्ष के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस जीत पर खुशी जताते हुए ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर तंज कसते हुए पूछा, “वे कौन 15 लोग हैं जो भागकर हमें वोट दे गए?” इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीपी राधाकृष्णन को बधाई दी और उम्मीद जताई कि वह संसदीय परंपराओं का सम्मान करेंगे और विपक्ष के लिए गरिमा सुनिश्चित करेंगे।

यह जीत एनडीए के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव की तुलना में अधिक जटिल थी। उस चुनाव में जगदीप धनखड़ ने विपक्षी उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 346 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से हराया था, जबकि इस बार जीत का अंतर 150 वोटों का रहा। हालांकि, यह जीत भी एनडीए की रणनीति और संख्याबल की ताकत को दर्शाती है।

सीपी राधाकृष्णन, जो तमिलनाडु से आते हैं और दो बार कोयंबटूर से लोकसभा सांसद रह चुके हैं, अपने राजनीतिक और सामाजिक अनुभव के लिए जाने जाते हैं। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माना जाता है। उनकी जीत से भाजपा को दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत करने में मदद मिलने की संभावना है।

 

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