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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को मिला नया न्यासी, कृष्णमोहन जी बने सदस्य

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 9 सितंबर 2025: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की बैठक में हरदोई निवासी पूर्व प्रशासनिक अधिकारी कृष्णमोहन जी को नया न्यासी नियुक्त किया गया है। यह निर्णय अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और न्यास के कार्यों को और मजबूती देने के उद्देश्य से लिया गया है। कृष्णमोहन जी की नियुक्ति से न्यास में एक अनुभवी और निष्ठावान सदस्य शामिल हुआ है, जिनका सार्वजनिक सेवा का लंबा इतिहास रहा है।

कृष्णमोहन जी का जन्म उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद के सिकंदरपुर बाजार में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय से पूरी की, जहाँ से उन्होंने भूविज्ञान (Geology) में एम.एससी. की डिग्री प्राप्त की। अपनी शैक्षणिक यात्रा पूरी करने के बाद, उन्होंने कुछ वर्षों तक परमाणु ऊर्जा विभाग में एक वैज्ञानिक के रूप में काम किया।

1978 में, कृष्णमोहन जी का भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service) में चयन हुआ। उन्होंने अपने करियर का अधिकांश समय महाराष्ट्र राज्य में वन विभाग के विभिन्न पदों पर सेवा करते हुए बिताया। उनकी कार्यशैली हमेशा ही अनुशासित और समर्पित रही, जिसके परिणामस्वरूप वे 2012 में अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (A.P.C.C.F) के पद से सेवानिवृत्त हुए। वन विभाग में उनकी सेवा को हमेशा पर्यावरण संरक्षण और वन प्रबंधन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए याद किया जाएगा।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में उनकी नियुक्ति को एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। राम मंदिर के भव्य निर्माण और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे न्यास में उनका अनुभव और प्रशासनिक कौशल बहुत लाभदायक साबित होगा। कृष्णमोहन जी को उनकी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाना जाता है, जो उन्हें इस पवित्र कार्य के लिए एक आदर्श व्यक्ति बनाता है।

न्यास की इस बैठक में उनकी नियुक्ति पर सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उनका मानना है कि कृष्णमोहन जी के आने से राम मंदिर निर्माण और न्यास के कार्यों में एक नई ऊर्जा और दिशा मिलेगी। यह कदम मंदिर के विकास और उससे संबंधित सामाजिक कार्यों को गति देने में भी मदद करेगा।

इस नियुक्ति के साथ, राम मंदिर निर्माण परियोजना में शामिल लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा हो। कृष्णमोहन जी जैसे अनुभवी और समर्पित व्यक्तियों का जुड़ना यह दर्शाता है कि यह परियोजना न केवल धार्मिक, बल्कि राष्ट्रीय महत्व की भी है।

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