Site icon Samagra Bharat News website

‘अर्बन माओवादी’ जैसा बोलते हैं राहुल गांधी: फडणवीस

अर्बन माओवादी जैसा बोलते हैं राहुल गांधी फडणवीस

अर्बन माओवादी जैसा बोलते हैं राहुल गांधी फडणवीस

समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 19 सितंबर, 2025: भारतीय राजनीति में ‘शहरी माओवादी’ (अर्बन माओवादी) का आरोप-प्रत्यारोप एक बार फिर गरमा गया है। इस बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर यह गंभीर आरोप लगाया है। यह हमला राहुल गांधी के उस सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने युवा पीढ़ी, जिसे ‘जेन-जी’ (Gen-Z) कहा जाता है, से भारत के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करने की अपील की थी।

फडणवीस ने राहुल गांधी के पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “राहुल गांधी अर्बन माओवादी की तरह बोलते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी ने ‘जेन-जी’ से संवैधानिक रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया है, जो पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। फडणवीस ने इस बात पर भी जोर दिया कि राहुल गांधी का दिमाग चोरी हो गया है और जब किसी का दिमाग चुरा लिया जाता है, तो लोग इस तरह की बातें करते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब फडणवीस ने राहुल गांधी पर अर्बन माओवादी होने का आरोप लगाया है। इससे पहले भी उन्होंने राहुल की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में अर्बन नक्सल संगठनों के शामिल होने का दावा किया था। फडणवीस के अनुसार, राहुल गांधी भारत की पारंपरिक संवैधानिक व्यवस्था पर विश्वास नहीं करते हैं और उनके विचार वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी अब कांग्रेस की पारंपरिक सोच को छोड़कर एक अलग ही दिशा में जा रहे हैं।

राहुल गांधी का ‘जेन-जी’ पर केंद्रित पोस्ट तब आया, जब उन्होंने चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया था। राहुल ने अपने पोस्ट में कहा था कि “देश के युवा, देश के छात्र, देश की Gen Z संविधान को बचाएंगे, लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वोट चोरी को रोकेंगे।” इस पोस्ट पर भाजपा के कई नेताओं ने पलटवार किया है, जिसमें देवेंद्र फडणवीस का बयान सबसे तीखा माना जा रहा है। भाजपा का मानना है कि राहुल गांधी इस तरह के बयान देकर युवाओं को गुमराह कर रहे हैं और देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

वहीं, कांग्रेस ने फडणवीस के बयान को ‘बेतुका’ बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी सिर्फ लोकतंत्र और संविधान को बचाने की बात कर रहे हैं, जो हर नागरिक का कर्तव्य है। यह आरोप-प्रत्यारोप दर्शाता है कि कैसे राजनीतिक दल हर मुद्दे पर आमने-सामने आ रहे हैं और शब्दों की सीमा भी पार कर रहे हैं। आने वाले समय में, यह बहस और भी तेज होने की संभावना है, क्योंकि दोनों पार्टियां मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही हैं।

लेटेस्ट हिंदी समाचार अपडेट के लिए Facebook पर  Samagra Bharat के पेज को फॉलो करें।

Exit mobile version