Site icon Samagra Bharat News website

असम पुलिस ने जुबीन गर्ग की मौत की जांच के लिए SIT बनाई

असम पुलिस ने जुबीन गर्ग की मौत की जांच के लिए SIT बनाई

असम पुलिस ने जुबीन गर्ग की मौत की जांच के लिए SIT बनाई

समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, 26 सितंबर: असम के जाने-माने गायक और सांस्कृतिक प्रतीक जुबीन गर्ग की असमय मौत ने पूरे राज्य को सदमे में डाल दिया है। 24 सितंबर को हुई उनकी मृत्यु के बाद, सोशल मीडिया और जनता के बीच कई तरह की अफवाहें और संदेह फैल रहे हैं, जिसके चलते अब असम पुलिस ने मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने गायक की मौत से जुड़ी सभी परिस्थितियों की जांच के लिए एक 10-सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

इस एसआईटी का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक (कानून और व्यवस्था) दिगंत बोरा करेंगे। इस टीम में विभिन्न विशेषज्ञ और अनुभवी अधिकारी शामिल हैं, जिनका काम मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच करना होगा। जुबीन गर्ग केवल एक गायक नहीं थे, बल्कि वे असमिया संस्कृति और समाज के एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय रखी थी, जिसके कारण उनकी मौत पर सवाल उठना स्वाभाविक था।

जनता और संगठनों की मांग के बाद लिया गया फैसला

जुबीन गर्ग की मौत के बाद, उनके प्रशंसकों और कई संगठनों ने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और एक निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। सोशल मीडिया पर #JusticeForZubeenGarg जैसे हैशटैग भी ट्रेंड कर रहे थे। जनता में यह भावना थी कि उनकी मौत स्वाभाविक नहीं थी और इसके पीछे कोई साजिश हो सकती है। इन मांगों और बढ़ते दबाव के बाद ही असम पुलिस ने एसआईटी का गठन करने का फैसला किया।

यह एसआईटी जुबीन गर्ग के अंतिम दिनों के दौरान उनके साथ रहे लोगों से पूछताछ करेगी, उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड की जांच करेगी और किसी भी संभावित साजिश के एंगल से भी जांच करेगी। पुलिस का कहना है कि इस जांच का उद्देश्य केवल सच्चाई को सामने लाना है, ताकि जुबीन के परिवार और उनके लाखों प्रशंसकों को सही जानकारी मिल सके और वे इस दुख की घड़ी में शांति प्राप्त कर सकें।

जुबीन गर्ग का निधन असम के संगीत जगत के लिए एक बड़ा झटका है। उन्होंने अपने गीतों से एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित किया था। उनकी मौत के बाद राज्य में शोक की लहर दौड़ गई थी। पुलिस द्वारा इस मामले को गंभीरता से लेना और एसआईटी का गठन करना यह दर्शाता है कि सरकार भी इस मामले में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती है।

Exit mobile version