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CJI गवई पर हमला: पीएम मोदी बोले – ‘हर भारतीय आक्रोशित’, शांत प्रतिक्रिया की सराहना

CJI गवई पर हमला पीएम मोदी बोले - हर भारतीय आक्रोशित

CJI गवई पर हमला पीएम मोदी बोले - हर भारतीय आक्रोशित

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर, 2025: सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 को देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब एक वकील ने सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की ओर जूता फेंकने का प्रयास किया। यह घटना कोर्ट रूम नंबर 1 में उस समय हुई, जब सीजेआई अपनी पीठ के साथ मामलों की सुनवाई कर रहे थे। सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर आरोपी वकील राकेश किशोर को पकड़ लिया और उसे कोर्ट रूम से बाहर ले गए।

बताया जा रहा है कि आरोपी वकील ने इस दौरान ‘सनातन का अपमान नहीं सहेंगे’ जैसे नारे भी लगाए। यह घटना कथित तौर पर खजुराहो में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की बहाली से जुड़े एक पुराने मामले में सीजेआई गवई की टिप्पणी से जुड़ी हुई है, जिसे सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रचारित किया गया था।

पीएम मोदी ने की कड़ी निंदा

इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई से फोन पर बात की और घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा:

“भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति बी. आर. गवई जी से बात की। आज सुबह सुप्रीम कोर्ट परिसर में उन पर हुआ हमला हर भारतीय को आक्रोशित कर गया है। हमारे समाज में ऐसे निंदनीय कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है। यह अत्यंत निंदनीय है।”

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी स्थिति का सामना करने में न्यायमूर्ति गवई द्वारा प्रदर्शित शांति और संयम सराहनीय है। यह न्याय के मूल्यों और हमारे संविधान की भावना को मजबूत करने के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सीजेआई गवई का अविचलित रहना

घटना के दौरान न्यायमूर्ति गवई ने असाधारण शांति और दृढ़ता का प्रदर्शन किया। उन्होंने अदालत में मौजूद वकीलों से कहा, “इन सब पर ध्यान मत दें। हम विचलित नहीं हैं। ऐसी बातें मुझे प्रभावित नहीं करतीं।” उन्होंने कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया, जो न्यायपालिका की गरिमा और कर्तव्यनिष्ठा को रेखांकित करता है। उनकी इस अविचलित प्रतिक्रिया की देश भर में, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं द्वारा सराहना की गई।

बार काउंसिल की तत्काल कार्रवाई

इस घटना को न्यायिक गरिमा का गंभीर उल्लंघन मानते हुए, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने तत्काल कार्रवाई की। बीसीआई ने वकील राकेश किशोर का लाइसेंस निलंबित कर दिया है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। निलंबन अवधि के दौरान वह देश के किसी भी न्यायालय, न्यायाधिकरण या प्राधिकरण के समक्ष पेश नहीं हो सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘अदालती शिष्टाचार का घोर उल्लंघन’ और ‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला’ बताया है।

न्यायपालिका की सुरक्षा और संवैधानिक मूल्य

विपक्षी नेताओं, जिनमें कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शामिल हैं, ने भी इस हमले की निंदा की है। सोनिया गांधी ने इसे “संविधान पर हमला” बताया, जबकि राहुल गांधी ने कहा कि यह “हमारी न्यायपालिका की गरिमा और हमारे संविधान की भावना पर हमला है।”

यह घटना देश में न्यायपालिका की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा करती है और इस बात को भी उजागर करती है कि कैसे धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग करके संस्थागत गरिमा को ठेस पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। न्यायपालिका पर इस तरह का हमला देश के कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला है।

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