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लद्दाख के सोनम वांगचुक: देशभक्त से ‘देशद्रोही’ बनाए गए नायक की कहानी

लद्दाख के सोनम वांगचुक: देशभक्त से ‘देशद्रोही’ बनाए गए नायक की कहानी

पूनम शर्मा
कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक रहे और देश के इनोवेशन आइकन माने जाने वाले सोनम वांगचुक आज “अरब स्प्रिंग जैसी बगावत” की साजिश के आरोप में जेल में हैं। शिक्षा सुधारक, पर्यावरणविद् और फिल्म थ्री इडियट्स के किरदार ‘फुंसुख वांगडू’ की प्रेरणा रहे वांगचुक अब “देशद्रोह” के आरोपों में जाँच का सामना कर रहे हैं।

जब मोदी को कहा था ‘थैंक यू’

5 अगस्त 2019 की रात, जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया, तो वांगचुक ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा – “थैंक यू प्रधानमंत्रीजी, लद्दाख का सपना पूरा हुआ।”
लद्दाख लंबे समय से जम्मू-कश्मीर से अलग होकर केंद्रशासित प्रदेश बनने की मांग करता रहा था। मोदी सरकार ने यह मांग तो पूरी कर दी, पर लद्दाख को विधानसभा या जनप्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। यही निर्णय आगे चलकर असंतोष की चिंगारी बना।

शांत आंदोलन से हिंसक टकराव तक

वांगचुक ने लद्दाख के लिए “छठी अनुसूची” के तहत जनजातीय स्वायत्तता की मांग को लेकर कई शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए। सितंबर 2025 में वे भूख हड़ताल पर बैठे थे, लेकिन 15वें दिन कुछ युवाओं ने अलग होकर लेह में बीजेपी कार्यालय को आग लगा दी। सुरक्षा बलों की गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई।
इसके बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई शुरू की — 80 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया, और 26 सितंबर को वांगचुक को भी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया गया। उन्हें लद्दाख से 1600 किलोमीटर दूर जोधपुर जेल भेजा गया।

‘देशद्रोह’ का ठप्पा

वांगचुक पर आरोप है कि उन्होंने “अरब स्प्रिंग जैसी बगावत” का आह्वान किया और प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाया। पुलिस का दावा है कि एक पाकिस्तानी खुफिया एजेंट के मोबाइल से वांगचुक के आंदोलन के वीडियो मिले हैं।
हालांकि, उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो का कहना है — “जिस सरकार ने कल उन्हें सम्मानित किया, आज वही उन्हें देशद्रोही कह रही है। ये सिर्फ उन्हें चुप कराने की कोशिश है।”

‘शोक में लद्दाख’

लेह में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। गिरफ्तारियों के बीच एक व्यापारी स्तानजिन दोरजे ने आत्महत्या कर ली। लेह बौद्ध एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा, “लोग पूछ रहे हैं – वांगचुक का अपराध क्या था? वे तो भूख हड़ताल पर बैठे थे।”
वांगचुक का आंदोलन अब ‘जन आंदोलन’ बन चुका है। स्थानीय संगठनों ने सरकार से सभी गिरफ्तार लोगों की रिहाई और मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।

कौन हैं सोनम वांगचुक?

1966 में लद्दाख के उलेटोकपो गांव में जन्मे वांगचुक ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद 1988 में SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) की स्थापना की। इस वैकल्पिक शिक्षा मॉडल ने लद्दाख की शिक्षा प्रणाली बदल दी — जहां पहले 95% छात्र फेल होते थे, वहीं कुछ वर्षों में पास दर 75% तक पहुंच गई।
उन्होंने “आइस स्तूपा” (कृत्रिम हिमनद) और “सोलर टेंट” जैसे नवाचार किए, जिनसे सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों और ग्रामीणों को मदद मिली। 2018 में उन्हें मैगसेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

राजनीति से टकराव

गलवान घाटी की झड़प (2020) के बाद उन्होंने “चीनी उत्पादों के बहिष्कार” का आह्वान किया। 2023 में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए खारदुंगला दर्रे पर अनशन किया — तब उन्हें नजरबंद कर दिया गया।
2024 में उन्होंने “संवैधानिक गारंटी” की मांग को लेकर अनशन-तिल-मृत्यु की घोषणा की। वे कहते रहे — “लद्दाख लोकतंत्र से वंचित है, यह दिल्ली के अफसरों से चलाया जा रहा है।”

सरकार का पक्ष और विरोध की चेतावनी

लद्दाख प्रशासन का कहना है कि वांगचुक ने कई बार “आत्मदाह” और “सरकार के तख्तापलट” जैसे बयान दिए, जिससे हिंसा भड़की। वहीं, स्थानीय संगठनों का आरोप है कि यह “राजनीतिक दमन” है।
कर्गिल डेमोक्रेटिक अलायंस के नेता सज्जाद कारगिली कहते हैं — “लद्दाख सीमावर्ती इलाका है। जनता को अलग-थलग करना खतरनाक है। सरकार आग से खेल रही है।”

‘लद्दाख को कश्मीर मत बनाइए’

वांगचुक की पत्नी का कहना है कि उनके संस्थानों की विदेशी फंडिंग रोकी जा रही है, कर्मचारियों को धमकाया जा रहा है। “सरकार लद्दाख को दूसरा कश्मीर बनाना चाहती है,” उन्होंने कहा।
अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से उनके गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी साझा करने को कहा है और 14 अक्टूबर को सुनवाई तय की है।

 सवाल लोकतंत्र का

सोनम वांगचुक, जिन्होंने शिक्षा, नवाचार और जलवायु परिवर्तन पर भारत का नाम ऊंचा किया, आज “देशद्रोह” के आरोपी हैं।
लद्दाख की जनता पूछ रही है —
क्या लोकतंत्र में सवाल उठाना अब अपराध है? क्या अपने अधिकार माँगना  देशद्रोह है?

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