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त्रिपुरा विवाद: TMC प्रतिनिधिमंडल को रोकने पर बिफरीं सीएम ममता

त्रिपुरा विवाद TMC प्रतिनिधिमंडल को रोकने पर बिफरीं सीएम ममता

त्रिपुरा विवाद TMC प्रतिनिधिमंडल को रोकने पर बिफरीं सीएम ममता

समग्र समाचार सेवा
कोलकाता/अगरतला, 8 अक्तूबर: पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच की राजनीतिक खींचतान अब एक गंभीर प्रशासनिक और कानूनी विवाद का रूप ले चुकी है। बुधवार, 8 अक्टूबर, 2025 को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में एक हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब TMC के एक प्रतिनिधिमंडल को अगरतला एयरपोर्ट पर पुलिस ने रोक दिया।

TMC का आरोप है कि त्रिपुरा में उसके पार्टी कार्यालय पर हाल ही में हमला हुआ था। इस घटना के बाद की स्थिति का जायजा लेने और ज़मीनी हकीकत जानने के लिए TMC के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों, जिनमें कुणाल घोष और सयानी घोष शामिल थे, की एक पांच सदस्यीय टीम अगरतला पहुंची थी। हालांकि, पार्टी नेताओं के मुताबिक, एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्हें भारी संख्या में मौजूद पुलिसकर्मियों ने घेर लिया और उन्हें पार्टी कार्यालय की ओर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस स्थिति के कारण टीएमसी नेताओं को लगभग ढाई घंटे तक एयरपोर्ट परिसर में ही रुकना पड़ा।

लोकतंत्र पर हमला: सीएम का सीधा आरोप

कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी इस घटना पर जमकर बिफरीं। उन्होंने त्रिपुरा की सत्ताधारी भाजपा सरकार और केंद्र सरकार दोनों पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने केवल पाँच लोगों की एक छोटी सी टीम भेजी थी। उन्हें हवाई अड्डे पर ही रोक दिया गया। हमारे कार्यकर्ता उन्हें लेने बाइक से आए थे, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं जाने दिया गया। यहाँ तक कि जब मैंने टीएमसी नेताओं से पैदल जाने को कहा, तब भी उन्हें रोका गया। क्या त्रिपुरा में लोकतंत्र पूरी तरह से समाप्त हो गया है?”

ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “अगर हमारे प्रतिनिधियों के साथ ऐसा ही होता रहा, तो मैं खुद त्रिपुरा जाऊंगी और उस समय मैं देखूंगी कि उनमें कितनी हिम्मत है और कौन मुझे रोकता है।” सीएम ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी त्रिपुरा में हो रही ‘लोकतंत्र की हत्या’ को चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगी और वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी हैं।

केंद्र पर भेदभाव का तंज़

त्रिपुरा के राजनीतिक विवाद के अलावा, सीएम ममता बनर्जी ने इस दौरान केंद्र सरकार की नीतियों पर भी तंज कसा और क्षेत्रीय भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग और अन्य हिस्सों में प्राकृतिक आपदा राहत कार्यों पर बात की और अगले सप्ताह फिर से उत्तर बंगाल का दौरा करने की पुष्टि की।

हालांकि, उन्होंने विमान किराए में छूट के मुद्दे पर केंद्र को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि एक ओर छठ पूजा के लिए विमान किराए में छूट दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर बागडोगरा से कोलकाता के हवाई टिकट का किराया आज 18,000 रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह बंगाल के प्रति भेदभाव नहीं है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मत

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ममता बनर्जी का स्वयं त्रिपुरा जाने का बयान, महज एक चेतावनी नहीं, बल्कि भाजपा शासित इस पूर्वोत्तर राज्य में पार्टी का विस्तार करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की एक सोची-समझी रणनीति है। TMC लगातार त्रिपुरा में अपनी राजनीतिक पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जहाँ अगले विधानसभा चुनावों में भाजपा को कड़ी टक्कर देने का उसका लक्ष्य है। प्रशासनिक बाधाओं के बावजूद, ममता बनर्जी के इस आक्रामक रुख ने राष्ट्रीय स्तर पर त्रिपुरा की राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

 

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