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ट्रंप के दावे पर भारत का दो टूक जवाब: ‘देशवासियों का हित सर्वोपरि’

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को यह दावा करके वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी थी कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें रूस से तेल की खरीद बंद करने का आश्वासन दिया है। इस दावे पर, भारत सरकार ने अब आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है और इस तरह के किसी भी निर्णय को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है।

गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत बड़े पैमाने पर गैस और तेल का आयात करता है। मंत्रालय ने कहा, “हमारी लगातार यही प्राथमिकता रही है कि उथल-पुथल भरे बाजार में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों को साधा जाए।” मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि हमारी इम्पोर्ट की पॉलिसी पूरी तरह से इसी उद्देश्य पर आधारित है।

“किसी अन्य कारक से प्रभावित नहीं होते हम”

विदेश मंत्रालय ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत सरकार किसी अन्य कारक से प्रभावित होकर अपने आर्थिक और ऊर्जा संबंधी फैसले नहीं लेती है। यह बयान सीधे तौर पर उन पश्चिमी दबावों की ओर इशारा करता है, जो यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस के साथ व्यापारिक संबंध कम करने के लिए भारत पर बनाए जा रहे हैं।

सरकार की दोटूक प्रतिक्रिया भारत की उस रणनीतिक स्वतंत्रता को दर्शाती है जिसके तहत वह अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखता है। रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद से भारत ने न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित किया है, बल्कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतों को भी स्थिर रखने में मदद मिली है।

आयात नीति का मुख्य आधार

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस आयातकों में से एक है। विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि देश की आयात नीति का एकमात्र उद्देश्य भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा करना है। अंतर्राष्ट्रीय भू-राजनीति और दबावों के बावजूद, भारत अपनी विदेश नीति को स्वतंत्र रूप से संचालित करने की अपनी स्थिति पर कायम है।

यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही ट्रंप के दावे के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला था। भारत की यह स्पष्टता वैश्विक ऊर्जा बाजार को एक मजबूत संकेत देती है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा का निर्धारण घरेलू जरूरतों और आर्थिक अनिवार्यता के आधार पर होगा, न कि किसी बाहरी राजनीतिक बयानबाजी से।

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