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लखनऊ में दलित बुजुर्ग से अमानवीय व्यवहार: इंसानियत शर्मसार, कांग्रेस ने झूठे राजनीतिक आरोपों से किया मुद्दे का दुरुपयोग

प्रतिज्ञा राय
समग्र समाचार सेवा
लखनऊ, 22 अक्टूबर: लखनऊ के काकोरी कस्बे में शीतला माता मंदिर परिसर में 60 वर्षीय दलित बुजुर्ग रामपाल रावत के साथ जो हुआ, उसने एक बार फिर समाज को झकझोर कर रख दिया। सांस की गंभीर बीमारी से जूझ रहे इस बुजुर्ग से बीमारी के कारण गलती से मंदिर परिसर में पेशाब हो गया, और इस पर स्थानीय युवक स्वामीकांत उर्फ पम्मू ने उनसे न केवल गालियां दीं, बल्‍कि कथित तौर पर उन्हें “शुद्धिकरण” के नाम पर अपमानजनक काम करने को मजबूर किया।

पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने तत्‍काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। एसीपी काकोरी शकील अहमद ने बताया कि आरोपी के खिलाफ BNS की धाराएं 115(2), 351(3), 352 और SC/ST एक्ट तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

इस घटना ने सिर्फ समाज को नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश को शर्मिंदा किया है। इस तरह का बर्ताव किसी सभ्य समाज में बर्दाश्त नहीं होना चाहिए। इंसानियत और संवेदनशीलता दोनों पर यह सीधा प्रहार है।

लेकिन इसी बीच विपक्ष ने इस दर्दनाक घटना को राजनीतिक रंग देने में देर नहीं लगाई। कांग्रेस ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर दावा किया कि आरोपी RSS से जुड़ा हुआ है, जबकि पुलिस ने साफ किया कि आरोपी का RSS या किसी राजनीतिक संगठन से कोई संबंध नहीं है। कांग्रेस ने इसे “BJP-शासित राज्य की दलित विरोधी मानसिकता” करार दिया, जो पूरी तरह तथ्यों के विपरीत और सस्ती राजनीति से प्रेरित बयान बाजी लगती है।

कांग्रेस जैसे दलों को यह समझना चाहिए कि किसी दल के खिलाफ भड़काऊ आरोप लगाने से न तो पीड़ित को न्याय मिलेगा, न ही समाज में सद्भाव बढ़ेगा। इस संवेदनशील मामले का राजनीतिक फायदा उठाना इंसानियत का नहीं, दलगत स्वार्थ का परिचायक है।

सवाल उठता है, जब भी ऐसी घटनाएं होती हैं, तब क्या हमें न्याय और सामाजिक सुधार की बात करनी चाहिए, या राजनीतिक स्कोरिंग करनी चाहिए?
अगर विपक्ष सच में दलितों के हित की बात करता है, तो उसे धरातल पर काम करना चाहिए, न कि सोशल मीडिया पर बयानबाजी।

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