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तेजस्वी यादव के एक फैसले से महागठबंधन में मचा बवाल, शाह ने उठाया फायदा — बढ़ी NDA की ताकत

समग्र समाचार सेवा 

पटना, 29 अक्टूबर: बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल अब पूरी तरह गर्म हो चुका है। एक ओर एनडीए (NDA) अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रहा है, तो वहीं दूसरी ओर महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, वाम दल आदि) भी प्रचार अभियान में पूरी ताकत झोंक रहा है। लेकिन इसी बीच तेजस्वी यादव का एक कदम अब उनके गठबंधन पर भारी पड़ता दिख रहा है।

दरअसल, हाल ही में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने पार्टी अनुशासन तोड़ने के आरोप में करीब 27 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस फैसले से न सिर्फ आरजेडी में असंतोष बढ़ा है, बल्कि कई नेताओं ने अब निर्दलीय या विरोधी दलों के टिकट पर मैदान में उतरने का फैसला कर लिया है। नतीजा, पार्टी में गुटबाज़ी और अंदरूनी कलह साफ़ झलकने लगी है।

बागियों ने बढ़ाई महागठबंधन की मुश्किलें

राजद, जेडीयू, कांग्रेस और हम, सभी पार्टियों में टिकट बंटवारे के बाद बगावत का सिलसिला तेज़ हो गया है। कई पुराने और प्रभावशाली नेताओं ने अब निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। इससे कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय और रोमांचक हो गया है।

कुछ बागी अपने पुराने दलों के अधिकृत उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदलते नज़र आ रहे हैं।

शाह ने दिखाया राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक

वहीं भाजपा और एनडीए ने इस मौके का भरपूर फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। गृह मंत्री अमित शाह ने कई नाराज़ नेताओं को साधने में सफलता पाई है, जिससे एनडीए का जनाधार और मजबूत हुआ है। हालांकि भाजपा को भी कुछ सीटों पर अपने बागी नेताओं से चुनौती मिल रही है। पार्टी ने विद्रोह करने वाले नेताओं को छह साल के लिए निष्कासित करते हुए साफ चेतावनी दी है कि वे पार्टी के नाम या प्रतीक का इस्तेमाल न करें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई होगी।

तेजस्वी के ‘एक्शन’ का उल्टा असर

तेजस्वी यादव के इस सख्त कदम का असर अब आरजेडी पर ही भारी पड़ रहा है। पार्टी से निकाले गए कई नेता अब अलग-अलग सीटों से निर्दलीय या विरोधी दलों के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।

इनमें प्रमुख नाम हैं —

इसी तरह शेरघाटी, संदेश, महनार, दरभंगा, जाले, मोतिहारी, सोनपुर, कटिहार और मधेपुरा की कई सीटों पर भी आरजेडी के बागियों ने चुनावी ताल ठोक दी है।

नतीजा, किसके पक्ष में जाएगा बगावत का फायदा?

बागियों के मैदान में उतरने से बिहार की कई सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। तेजस्वी के इस फैसले से जहां महागठबंधन में अंदरूनी संकट गहराया है, वहीं एनडीए इस असंतोष को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहा है। अब देखना यह है कि तेजस्वी का यह “अनुशासन वाला दांव” चुनाव में आशीर्वाद बनेगा या आफत।

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