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काराकाट का चुनावी ड्रामा: पत्नी ज्योति पर पवन सिंह मौन

समग्र समाचार सेवा
पटना, 01 नवंबर: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान राज्य की राजनीति में भोजपुरी सितारों का तड़का अपने चरम पर है। इसी कड़ी में, भोजपुरी सिनेमा के जाने-माने नाम पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच का निजी विवाद अब खुलकर चुनावी मैदान में आ गया है। ज्योति सिंह ने काराकाट निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ताल ठोकी है, जबकि पवन सिंह खुद बीजेपी के एक प्रमुख नेता और प्रचारक हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ काराकाट की लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों के बाहर आम जनता के लिए भी यह चर्चा का विषय बन गया है।

पवन सिंह का दो-तरफा रुख: पत्नी पर चुप्पी, खेसारी पर हमलावर

चुनावी प्रचार के बीच जब मीडिया ने पवन सिंह से उनकी पत्नी ज्योति सिंह की काराकाट से उम्मीदवारी को लेकर सवाल किए, तो उनका जवाब संक्षिप्त और चौंकाने वाला था। पवन सिंह ने इस पूरे मामले पर ‘नो कमेंट्स’ कहकर चुप्पी साध ली और आगे बढ़ गए। पति-पत्नी के बीच तलाक और आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनाव में आया यह मोड़ उनके जटिल रिश्ते को दर्शाता है।

हालांकि, जब पत्रकारों ने उनसे भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव के खिलाफ प्रचार करने को लेकर सवाल किया, तो पवन सिंह का रुख स्पष्ट था। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का केंद्रीय नेतृत्व या राज्य इकाई उन्हें खेसारी के खिलाफ प्रचार करने का आदेश देती है, तो वह निश्चित रूप से पार्टी के आदेश का पालन करते हुए प्रचार करेंगे। पवन सिंह का यह रुख दर्शाता है कि राजनीतिक प्रतिबद्धताओं और करियर की प्रतिद्वंद्विता में वह खेसारी को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार हैं, भले ही व्यक्तिगत जीवन की उथल-पुथल उन्हें पत्नी के मुद्दे पर मौन रहने को मजबूर कर रही हो।

ज्योति सिंह का बेबाक जवाब: बदनामी भी उन्हीं से मिली

काराकाट में अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटी ज्योति सिंह ने इस दौरान मीडिया से खुलकर बात की। उन्होंने उन आलोचकों को करारा जवाब दिया जो उन पर पवन सिंह के नाम का सहारा लेने का आरोप लगा रहे थे। ज्योति सिंह ने कहा, “पवन जी खुद को यहां का बेटा कहते हैं, तो मैं भी यहां की बहू हूं। मैं पिछले एक साल से जनता के बीच काम कर रही हूं और जनता के भरोसे ही यह चुनाव लड़ना चाहती थीं।”

सबसे तीखा जवाब उन्होंने ‘पहचान’ के मुद्दे पर दिया। ज्योति सिंह ने बेबाकी से कहा, “लोग कहते हैं कि पहचान पवन जी से मिली, तो मैं पूछना चाहती हूं कि बदनामी किस वजह से मिली? अगर नाम उनसे मिला तो बदनामी भी उन्हीं से मिली।” उन्होंने साफ किया कि वह अब सभी विवादों को पीछे छोड़कर केवल जनता के लिए काम करना चाहती हैं। यह बयान बताता है कि वह अपनी पहचान को केवल पति के नाम तक सीमित नहीं रखना चाहतीं और अपने दम पर राजनीतिक राह बनाना चाहती हैं।

नामांकन पत्र में पति का नाम न जोड़ने के मुद्दे पर भी ज्योति सिंह ने सफाई दी। उन्होंने बताया कि चूंकि उनके और पवन सिंह के बीच बात नहीं हो रही है और तलाक का मामला चल रहा है, इसलिए कागजातों में पति का नाम जोड़ना संभव नहीं था। ऐसा करने पर उन्हें पवन सिंह की संपत्ति का खुलासा भी करना पड़ता, इसलिए उन्होंने दस्तावेजों में अपने पिता का नाम ही दर्ज कराया है। इस तरह, काराकाट की यह सीट अब सिर्फ एक राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि भोजपुरी सितारों और एक पारिवारिक तकरार की पृष्ठभूमि पर रचा गया हाई-वोल्टेज ड्रामा बन चुकी है।

 

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