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अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर तेजस्वी पर JDU का हमला

समग्र समाचार सेवा
पटना, 02 नवंबर: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मोकामा विधानसभा सीट पर गरमाई राजनीति अब बयानबाजी के एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेडीयू प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह की गिरफ़्तारी के बाद, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना को बिहार में ‘महाजंगलराज’ का उदाहरण बताते हुए सरकार को घेरा था।

तेजस्वी यादव ने कहा था कि मोकामा में हुई घटना को देखते हुए अनंत सिंह की गिरफ़्तारी ज़रूरी थी, लेकिन प्रधानमंत्री के बिहार दौरे के बावजूद हत्या की घटनाएँ नहीं रुक रहीं, जो गंभीर चिंता का विषय है।

जेडीयू ने दानापुर के ‘रीतलाल’ पर घेरा

तेजस्वी यादव के बयान पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने पलटवार किया है और जेल में बंद दानापुर के विधायक व आरजेडी उम्मीदवार रीतलाल यादव को लेकर सवाल उठाए हैं।

नीरज कुमार ने तेजस्वी से सीधा सवाल करते हुए पूछा, “रीतलाल यादव किस मठ के महंत हैं? हमने (जेडीयू सरकार) तो बिना भेदभाव के अनंत सिंह पर त्वरित कार्रवाई करके दिखा दिया, पर आप क्या कर रहे हैं?”

उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार की सरकार ने मोकामा जैसे क्षेत्रों में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार किया है, जो 2005 से पहले कत्लगाह बन चुका था। नीरज कुमार ने कहा कि “हमारी सरकार अपराध की घटनाओं पर जाति, गोत्र, धर्म समुदाय नहीं देखती।”

‘76% आपराधिक छवि’ के नेताओं को टिकट देने का आरोप

जेडीयू प्रवक्ता ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरजेडी पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि आरजेडी ने अपने 76 प्रतिशत उम्मीदवारों को आपराधिक छवि के नेताओं को टिकट दिया है।

नीरज कुमार ने आरजेडी पर राजनीति में जंगलराज लाने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि “बिहार की जनता जानती है कि नीतीश कुमार हैं तो सब महफूज़ हैं, और बेटियाँ उड़ान भरेंगी।” इस तरह, जेडीयू ने अनंत सिंह की गिरफ़्तारी पर सफाई देने के बजाय, आरजेडी पर पलटवार करते हुए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के मुद्दे को उजागर कर दिया है।

घटना का विवरण: 30 अक्टूबर को मोकामा में चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अनंत सिंह को नामजद अभियुक्त बनाया गया था, जिसके बाद शनिवार देर रात पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया। इस मामले में चुनाव आयोग ने कड़ा एक्शन लिया है और अब तक पाँच अधिकारियों पर गाज गिरी है।

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