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वंदे मातरम के 150 साल: मोदी बोले, भारत की 280 करोड़ भुजाएं असंभव को संभव कर दिखाएंगी

मोदी 3.0 मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज, जुलाई में बड़े फेरबदल की चर्चा

समग्र समाचार सेवा

नई दिल्ली, 7 नवम्बर: वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि “वंदे मातरम” केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान इस गीत ने देश को एक सूत्र में बांधा था, लेकिन 1937 में इसके कुछ पदों को अलग कर देना एक ऐतिहासिक गलती थी, जिसने आगे चलकर देश के विभाजन के बीज बो दिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें 21वीं सदी को भारत की सदी बनाना है और इसके लिए सबसे बड़ा सामर्थ्य भारत की 140 करोड़ जनता में है। उन्होंने ‘आनंद मठ’ के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा, “जिस माता के करोड़ों पुत्र-पुत्री हों, उसके करोड़ों हाथ हों, वो माता अबला कैसे हो सकती है?”
मोदी ने युवाओं की ऊर्जा को भारत की 280 करोड़ भुजाओं की शक्ति बताते हुए कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा डेमोग्राफिक एडवांटेज हमारे पास है।

उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को वंदे मातरम की प्रेरणा से जोड़ते हुए कहा कि जब भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचता है या जब भारतीय बेटियां फाइटर जेट उड़ाती हैं, तब हर भारतीय के मुंह से गर्व से निकलता है, “वंदे मातरम।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज वन रैंक वन पेंशन योजना को लागू हुए 11 वर्ष पूरे हो गए हैं। जब भी हमारे सैनिक आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ जीत दर्ज करते हैं, वे इसी मंत्र से प्रेरित होते हैं,  “वंदे मातरम।”

भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने पूरे जोश के साथ कहा, “मां भारती की कोटि-कोटि संतानों को वंदे मातरम का मंत्र निरंतर प्रेरणा देगा। सभी देशवासी मेरे साथ खड़े होकर बोलिए, वंदे मातरम! वंदे मातरम!”

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