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आतंकी गढ़ में 5 भारतीयों का अपहरण: MEA ने शुरू किए प्रयास

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 08 नवंबर: पश्चिमी अफ़्रीका का देश बुर्किना फासो पिछले कुछ समय से अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (ISIS) जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों के बढ़ते प्रभाव और हिंसा से बुरी तरह जूझ रहा है। यह क्षेत्र आतंकवादियों का गढ़ बन चुका है, जहाँ अपहरण और हिंसा की घटनाएँ आम हो गई हैं। इसी बीच, बुर्किना फासो में काम कर रहे 5 भारतीय नागरिकों का अपहरण कर लिया गया है, जिससे भारत सरकार की चिंता बढ़ गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकवादियों के एक समूह ने इन भारतीयों को बंदूक की नोक पर अगवा किया है। इस घटना ने एक बार फिर असुरक्षित विदेशी क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया है। अपहरण के पीछे आतंकी संगठन की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन इस क्षेत्र में सक्रिय अल-कायदा और आईएसआईएस से जुड़े समूह ही ऐसी वारदातों को अंजाम देते रहे हैं। इन आतंकी समूहों का मुख्य उद्देश्य फिरौती या राजनीतिक लाभ के लिए दबाव बनाना होता है।

विदेश मंत्रालय की सक्रियता: उच्चाधिकारियों से संपर्क

घटना की जानकारी मिलते ही भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) में तुरंत सक्रियता बढ़ गई है। विदेश मंत्रालय ने इन 5 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित और जल्द से जल्द रिहा कराने के लिए उच्च स्तरीय प्रयास शुरू कर दिए हैं।

चूंकि बुर्किना फासो में भारत का दूतावास नहीं है, इसलिए विदेश मंत्रालय नाइजर की राजधानी नियामे में स्थित अपने भारतीय दूतावास के माध्यम से बुर्किना फासो के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। इसके अलावा, भारत ने आतंकवाद विरोधी अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क और क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियों से भी संपर्क साधा है, ताकि बंधक बनाए गए भारतीयों का पता लगाया जा सके और उन्हें सुरक्षित रिहा कराया जा सके।

MEA प्रवक्ता ने कहा कि भारत सरकार एक-एक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी संभावित राजनयिक और सुरक्षा चैनलों का उपयोग किया जा रहा है। सरकार ने प्रभावित भारतीय नागरिकों के परिवारों को भी लगातार अपडेट देने का आश्वासन दिया है।

आतंकवाद का गढ़ बन रहा पश्चिम अफ़्रीका

बुर्किना फासो में बढ़ते आतंकवाद और विदेशी नागरिकों के अपहरण की घटनाएँ पहली बार नहीं हुई हैं। पिछले कुछ सालों में, इस देश ने अल-कायदा और आईएसआईएस से जुड़े समूहों के हाथों कई हमलों और हिंसक वारदातों का सामना किया है। इन समूहों ने न केवल स्थानीय लोगों को निशाना बनाया है, बल्कि खनन और अन्य परियोजनाओं में लगे विदेशी कर्मचारियों को भी अगवा किया है।

इस क्षेत्र की अस्थिरता, कमजोर शासन और अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप की कमी ने आतंकवादियों को अपनी जड़ें जमाने का मौका दिया है। भारत सरकार ने पहले भी अपने नागरिकों को इन असुरक्षित क्षेत्रों की यात्रा न करने या वहाँ काम करते समय अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी है। यह हालिया अपहरण की घटना एक बार फिर भारत के लिए जटिल राजनयिक चुनौती पेश करती है, जहाँ सरकार को एक ऐसे क्षेत्र में अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाना है जो सीधे तौर पर वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बना हुआ है।

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