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व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण: RSS @100

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 08 नवंबर: दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) के कमला नेहरू कॉलेज परिसर में एक युवा संगठन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक युवा सम्मेलन “विमर्श 2025” के दूसरे दिन का शुभारंभ भारत की “अनेकता में एकता” को दर्शाने वाली शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। यह सम्मेलन विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में आयोजित किया गया।

इस दिन का मुख्य विषय था: “100 वर्ष की सेवा और राष्ट्र निर्माण: आत्मनिर्भर भारत की ओर।” इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुकुंद बिहारी, RSS चिंतक रतन शारदा, पत्रकार राहुल रौशन, और पैनलिस्ट नेहा बेनिवाल सहित कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस चर्चा का केंद्रीय भाव यह रहा कि कैसे व्यक्ति के निर्माण से ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव हो सकता है।

चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक जड़ों पर ज़ोर

मुख्य अतिथि मुकुंद बिहारी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत जिन चुनौतियों जैसे अपराध, सामाजिक विकृतियों और आतंकवाद का सामना कर रहा है, उनकी जड़ें नैतिक और सांस्कृतिक असंतुलन में निहित हैं। उन्होंने कहा कि RSS केवल जन्मदिन मनाने के लिए नहीं है, बल्कि समाज को बदलने के लिए है। मुकुंद बिहारी ने जोर दिया कि RSS चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक जड़ों के माध्यम से राष्ट्र का पुनर्निर्माण करता है। उन्होंने RSS के ‘पंच परिवर्तन’ (सद्भाव, पारिवारिक जागरूकता, पर्यावरण, स्वयं और नागरिक कर्तव्य) को सामाजिक परिवर्तन के लिए केंद्रीय बताया।

वहीं, RSS विचारक रतन शारदा ने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य उसकी ‘सेवा’ है, यह कोई आकस्मिक उत्पाद नहीं है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रवाद को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि भारत का राष्ट्रवाद हजारों साल पुराना है—यह संस्कृति से प्रेरित है, न कि संविधान से। यह “विविध रूपों में व्यक्त एकता” है।

मीडिया में वैचारिक बदलाव और युवाओं को संदेश

स्वतंत्र पत्रकार राहुल रौशन ने भारतीय मीडिया परिदृश्य में आ रहे वैचारिक संतुलन पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारतीय मीडिया में एक ही विचारधारा का झुकाव दिखता था, लेकिन अब इसमें बदलाव आ रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि पहले हिंदुओं के खिलाफ अपराधों को नजरअंदाज कर दिया जाता था, लेकिन आज ऐसी खबरों को भी समान गंभीरता से रिपोर्ट किया जा रहा है।

युवाओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने उनसे सेवा, सद्भाव और जिम्मेदारी को आत्मसात करने का आग्रह किया। राहुल रौशन ने निष्कर्ष में युवाओं को संदेश दिया: “आज के युवाओं को तर्क और दूरदृष्टि के साथ राष्ट्र हित में खड़ा होना चाहिए। अगर हम बदलेंगे, तो राष्ट्र बदलेगा; अगर हम सोचेंगे, तो राष्ट्र सोचेगा।”

इस सम्मेलन ने स्पष्ट किया कि RSS की शताब्दी यात्रा का फोकस व्यक्ति को नैतिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनाने पर रहा है, जिससे एक आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की नींव रखी जा सके। इस कार्यक्रम का समापन देशभक्ति के गीतों और एकता के संदेश के साथ हुआ।

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