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‘हमको मीठा दीजिएगा’: स्मृति ईरानी ने चखे गोलगप्पे

समग्र समाचार सेवा
पटना, 09 नवंबर: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। एनडीए और बीजेपी के सहयोगी दलों के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी लगातार रैलियों और रोड शो के जरिए धुआंधार प्रचार कर रही हैं। इसी व्यस्तता के बीच, शनिवार को उन्होंने पटना की सड़कों पर एक आम नागरिक की तरह रुककर गोलगप्पे (पानी पुरी) का लुत्फ उठाया।

यह घटना पटना में भाजपा कार्यालय कैंपस के पास हुई, जहाँ एक ठेले वाले ने गोलगप्पे लगाए हुए थे। स्मृति ईरानी अपनी चुनावी थकान और तनाव को दूर करने के लिए खुद को गोलगप्पे खाने से रोक नहीं पाईं। इस दौरान उनके साथ बीजेपी सांसद अनिल बलूनी समेत पार्टी के कई अन्य नेता भी मौजूद थे, जिन्होंने उनके साथ इस ‘गोलगप्पा पार्टी’ में हिस्सा लिया।

वायरल वीडियो में मीठा पानी माँगती हुईं स्मृति

गोलगप्पे खाते हुए स्मृति ईरानी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उनकी सहजता और आम लोगों से मिलने का अंदाज साफ झलक रहा है। वीडियो में एक मजेदार पल तब आया जब तीखा गोलगप्पा खाने के बाद उन्होंने ठेले वाले से आग्रह किया, “हमको मीठा दीजिएगा,” यानी उन्होंने तीखे पानी के बजाय मीठे पानी की माँग की।

यह पल दिखाता है कि कैसे कड़े राजनीतिक मुकाबले के बीच भी नेता सामान्य जीवन के छोटे-छोटे पलों का आनंद लेने से नहीं चूकते। स्मृति ईरानी ने इस दौरान आस-पास मौजूद आम लोगों से मुलाकात करने और बातचीत करने में भी कोई संकोच नहीं किया, जिससे उनकी सरल छवि सामने आई।

मधुबनी का तनावपूर्ण रोड शो और चुनावी ब्रेक

स्मृति ईरानी का यह फुर्सत का पल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले शनिवार को ही उन्हें मधुबनी जिले के बेनीपट्टी में एक तनावपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा था। बेनीपट्टी विधानसभा में एनडीए के बीजेपी प्रत्याशी विनोद नारायण झा के समर्थन में उनका रोड शो आयोजित किया गया था।

झड़प के कारण रोड शो हुआ छोटा

रोड शो के दौरान, भाजपा समर्थित कार्यकर्ताओं और भाजपा से बागी हुए निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थकों के बीच झड़प हो गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि स्मृति ईरानी को करीब आधे घंटे तक अपनी पिकअप वैन पर ही खड़ा रहना पड़ा जब तक कि भीड़ शांत नहीं हो गई।

इस झड़प के कारण, उनका 30 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित रोड शो मात्र एक किलोमीटर में ही समाप्त हो गया और उन्हें वापस लौटना पड़ा। दिन भर की इस तनावपूर्ण राजनीतिक गरमागरमी के बाद, पटना में गोलगप्पे का यह ब्रेक उनके लिए निश्चित रूप से राहत भरा रहा होगा, जिसने उन्हें अगले चरण के प्रचार के लिए फिर से ऊर्जा दी।

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