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बिहार: 5 सीटें जीतकर AIMIM ने मांगा CM पद, नीतीश को PM का ऑफर

समग्र समाचार सेवा
पटना, 15 नवंबर: बिहार विधानसभा चुनाव में NDA को 202 सीटों का स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद, राजनीतिक गलियारों में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM, जिसने सीमांचल क्षेत्र में 5 सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, उसने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) को मिलाकर सरकार बनाने का एक हैरान कर देने वाला ऑफर दिया है।

AIMIM बिहार के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर यह सनसनीखेज पेशकश की गई। पार्टी ने दावा किया कि अगर JDU (85 सीटें), RJD (25 सीटें), कांग्रेस (6 सीटें), AIMIM (5 सीटें), सीपीआईएमएल (3 सीटें) और सीपीआईएम (3 सीटें) एक साथ आ जाएँ, तो उनके पास बहुमत के जादुई आँकड़े 122 से अधिक सीटें (कुल 127 सीटें) हो सकती हैं, और इस प्रकार एक गैर-NDA सरकार का गठन संभव है।

मुख्यमंत्री पद पर AIMIM का सीधा दावा

AIMIM की इस पेशकश में सबसे अधिक चौंकाने वाला बिंदु मुख्यमंत्री पद पर उसका सीधा दावा है। 5 सीटें जीतने वाली पार्टी ने न सिर्फ सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा, बल्कि कैबिनेट की रूपरेखा भी तय कर दी।

प्रस्ताव के अनुसार:

AIMIM का मुख्यमंत्री होगा।

JDU को दो उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) और 20 मंत्री दिए जाएँगे।

RJD को 6 मंत्री पद मिलेंगे।

कांग्रेस को 2 मंत्री पद मिलेंगे।

वाम दल (CPI-ML और CPIM) को एक-एक मंत्री पद दिया जाएगा।

इतना ही नहीं, AIMIM ने JDU को लुभाने के लिए एक बड़ा राष्ट्रीय राजनीतिक दाँव भी खेला है। पार्टी ने कहा है कि वह नीतीश कुमार को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का वादा करती है।

राजनीति में ‘जुड़ने’ और ‘तोड़ने’ का दावा

AIMIM ने अपने इस प्रस्ताव को ‘जोड़ने की राजनीति’ बताया और कहा कि वे हमेशा जोड़ने की राजनीति करते हैं, तोड़ने की नहीं, इसलिए अभी भी मौका है।

गौरतलब है कि चुनाव से पहले AIMIM ने महागठबंधन में शामिल होने की कोशिश की थी, लेकिन RJD और कांग्रेस ने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया था। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि सीमांचल क्षेत्र में AIMIM के चुनाव लड़ने के कारण मुस्लिम वोटों का बिखराव हुआ, जिससे RJD और कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ। अब चुनाव में NDA को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद भी AIMIM का यह प्रस्ताव, भले ही असंभव लगे, लेकिन यह भारतीय राजनीति में छोटे दलों की महत्वाकांक्षा को उजागर करता है।

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