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राजनीति पर बयान देना पड़ा भारी: नीतू चंद्रा SVEEP आइकॉन पद से हटाई गईं

समग्र समाचार सेवा
पटना, 16 नवंबर: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के दिन, अभिनेत्री नीतू चंद्रा को टेलीविजन चैनलों पर सक्रिय राजनीतिक बातें करना भारी पड़ गया है। एक वीडियो वायरल होने के बाद, जिसमें वह राजनीतिक टिप्पणी करती नजर आ रही हैं, चुनाव आयोग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से बिहार में मतदाता जागरण के SVEEP (Systematic Voters’ Education and Electoral Participation) आइकॉन के पद से हटा दिया है।

नीतू चंद्रा के साथ, पंकज झा, चंदन राय और क्रांति प्रकाश को भी अधिक से अधिक मतदान के लिए मतदाताओं को जागरूक करने हेतु एक तरह का ब्रांड एंबेसडर, यानी SVEEP आइकॉन बनाया गया था।

नीतू चंद्रा ने क्या कहा था?

चुनाव आयोग के आइकॉन पद पर रहते हुए नीतू चंद्रा एक समाचार चैनल पर राजनीतिक बातें करती नजर आईं। उन्होंने कथित तौर पर लालू यादव और राबड़ी देवी के कार्यकाल के दौरान बिहार में शाम 5 बजे के बाद घर से बाहर न निकलने की सलाह और अपहरण (Kidnapping) जैसी घटनाओं की याद दिलाई। बीजेपी और एनडीए गठबंधन इस दौर को ‘जंगलराज’ कहते रहे हैं।

नीतू चंद्रा ने मतदान प्रतिशत बढ़ने का कारण बताते हुए भी ‘जंगलराज’ का नाम लिया और कहा कि लोग तनाव में थे, क्योंकि उसका आतंक लोगों के मन में था। इसके अलावा, उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार की तारीफ की और डबल इंजन की सरकार से बिहार में हुए विकास और बदलाव पर सकारात्मक राय रखी। उनका यह बयान चुनाव आयोग की निष्पक्षता की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका, जिसके बाद आयोग ने उन्हें पद से हटाने का फैसला किया।

बढ़ा था मतदान, अब हुई छुट्टी

SVEEP आइकॉन के रूप में नीतू चंद्रा ने चुनाव आयोग की ओर से बिहार के 18 जिलों में कई तरह के जनजागरण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था, जिसका उद्देश्य मतदान प्रतिशत बढ़ाना था। बिहार चुनाव में इस बार 67.13 फीसदी वोटिंग के साथ, आजादी के बाद से अब तक के सारे रिकॉर्ड टूट गए थे। पुरुषों (62.98%) की तुलना में महिलाओं (71.78%) ने 9 फीसदी अधिक मतदान किया था।

चुनाव आयोग का यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि मतदाता जागरूकता अभियान से जुड़े किसी भी व्यक्ति को किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा का समर्थन या विरोध करने वाली टिप्पणी से बचना चाहिए, ताकि अभियान की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे। आयोग के फैसले के बाद, अब नीतू चंद्रा की बिहार में मतदाता जागरूकता की जिम्मेदारी समाप्त हो गई है।

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