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दिल्ली धमाके पर कांग्रेस नेता का विवादित बयान

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 18 नवंबर: 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के नजदीक हुए कार बम विस्फोट में 10 से अधिक लोगों की मौत और कई घायलों की घटना से पूरा देश स्तब्ध था। अभी राष्ट्रीय जांच एजेंसियां (NIA) मामले की जाँच में जुटी हुई हैं, लेकिन इसी बीच कांग्रेस के पूर्व सांसद हुसैन दलवाई ने एक बेहद विवादित बयान देकर राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।

दलवाई ने इस हमले को सीधे तौर पर कश्मीर के मुद्दे से जोड़ दिया। उन्होंने कहा, “यह हमला जम्मू-कश्मीर में किए जा रहे कथित अन्याय और जुल्म की प्रतिक्रिया भी हो सकता है।” इस बयान ने एक बार फिर कांग्रेस को विपक्षी दलों, विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP), के निशाने पर ला दिया है।

चुनावी समय पर सवाल और सियासी बवाल

हुसैन दलवाई केवल कश्मीर के मुद्दे पर ही नहीं रुके। उन्होंने धमाके के समय को लेकर भी सवाल खड़े किए। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले हुए इस हमले पर टिप्पणी करते हुए दलवाई ने पूछा, “आखिर चुनावों के आस-पास ही ऐसे बम धमाके क्यों होते हैं? इस पूरे मामले की गहन जाँच होनी चाहिए।”

उनके इस बयान को भाजपा ने तुरंत भुनाया, आरोप लगाया कि कांग्रेस आतंकवाद के कृत्यों को न्यायसंगत ठहराने की कोशिश कर रही है और चुनावी लाभ के लिए ऐसे संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिकरण कर रही है। इससे पहले, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी इस धमाके को कश्मीर की समस्याओं से जोड़ा था, जिसे दलवाई ने एक तरह से समर्थन दे दिया।

भाजपा का तीखा पलटवार: आतंकवाद का बचाव

कांग्रेस नेता के इस बयान पर भाजपा ने तुरंत और तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने दलवाई पर हमला बोलते हुए कहा कि, “महबूबा मुफ्ती के बाद, अब हुसैन दलवाई भी आतंकवाद के लिए स्पिन डॉक्टर बन गए हैं। एक तरह से उन्होंने दिल्ली विस्फोट के आरोपियों को क्लीन चिट दे दी है।” उन्होंने कांग्रेस पर आतंकवाद की निंदा न करने और अलगाववादियों की भाषा बोलने का आरोप लगाया।

एक अन्य भाजपा प्रवक्ता अमित मालवीय ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘वोट बैंक की राजनीति’ करार दिया और कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह आतंकवाद के खिलाफ है या उसका बचाव कर रही है। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का यह रुख देश की सुरक्षा और एकता के लिए खतरा पैदा करता है।

दलवाई की सफाई, लेकिन रुख पर कायम

विवाद बढ़ता देख, हुसैन दलवाई ने अपने बयान पर सफाई देने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह की हिंसा या आतंकवादी कृत्य का समर्थन नहीं कर सकते। हालांकि, उन्होंने कश्मीर में कथित अन्याय की अपनी मूल बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी एक पूरे समुदाय को निशाना नहीं बनाना चाहिए और कश्मीर के मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान खोजना चाहिए।

इससे पहले भी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी एक बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया था, जिसमें उन्होंने आतंकवादियों को ‘विदेशी’ और ‘घरेलू’ श्रेणियों में बाँटा था। राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि पार्टी के नेताओं के ये लगातार विवादास्पद बयान, आतंकवाद जैसे संवेदनशील विषय पर कांग्रेस की स्पष्ट नीति को लेकर सवाल खड़े करते हैं।

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