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साइबर अपराधियों को अब नहीं मिलेगी जमानत: डिजिटल अरेस्ट ठगी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला

एनसीईआरटी ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को पाठ्यपुस्तक में शामिल किया

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 18 नवंबर: सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट ठगी को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि इस गंभीर साइबर अपराध में पकड़े गए आरोपियों को कोई भी अदालत जमानत नहीं देगी। यह आदेश उस समय आया, जब 72 वर्षीय महिला वकील को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे 3.29 करोड़ रुपये हड़पे जाने का मामला सर्वोच्च अदालत के सामने रखा गया।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बाग्ची की पीठ ने कहा कि यह “असामान्य घटना है, इसलिए असामान्य हस्तक्षेप जरूरी है।” कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि आरोपित विजय खन्ना और अन्य सहअभियुक्त किसी भी निचली अदालत से रिहाई नहीं पा सकेंगे। यदि उन्हें कोई राहत चाहिए, तो वे सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करें।

पीठ के समक्ष सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने बताया कि पीड़ित महिला की जीवनभर की बचत खत्म हो गई, और प्रक्रिया संबंधी कमियों के कारण उनके पैसे की रिकवरी भी अटक गई है। मजिस्ट्रेट द्वारा रकम वापस करने का आदेश होने के बावजूद बैंक ने इसे मानने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने इस पर गहरी नाराजगी जताई और कहा कि ऐसे मामलों के लिए जल्द राष्ट्रीय स्तर के दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी एसोसिएशन की दलीलों का समर्थन करते हुए कहा कि साइबर अपराधी खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहे हैं और उनसे भारी रकम ऐंठ रहे हैं। कोर्ट ने इस प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि जल्द ही जागरूकता के लिए एक आधिकारिक विज्ञापन भी जारी करवाया जाएगा, जिसमें डिजिटल अरेस्ट के पीड़ितों से संपर्क करने की अपील होगी।

कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि डिजिटल अरेस्ट से जुड़े सभी मामलों को CBI को सौंपने पर विचार हो रहा है। इस संबंध में अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी।

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