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15 दिन, दो चुनावी अग्निपरीक्षा, BJP की जीत पर अब असली टेस्ट

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 19 नवंबर: बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की ऐतिहासिक सफलता के बाद पार्टी के लिए अब असली चुनौती शुरू होती दिख रही है। बिहार के जनादेश ने बीजेपी को राजनीतिक बढ़त दी है, लेकिन अब 15 दिनों के भीतर दो बड़े चुनावी मुकाबले उसके सामने खड़े हैं—दिल्ली नगर निगम का उपचुनाव और महाराष्ट्र का बहुचर्चित नगर निकाय चुनाव। ये दोनों चुनाव सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक संकेत तय करेंगे।

दिल्ली MCD उपचुनाव – AAP की साख और BJP की प्रतिष्ठा दोनों दांव पर

दिल्ली में फरवरी 2025 की हार के बाद आम आदमी पार्टी पहली बार किसी बड़े चुनाव में उतर रही है। कुल 12 वार्डों पर 30 नवंबर को मतदान होगा। AAP के लिए यह मौका है कि वह दिखा सके कि उसके पास अभी भी राजधानी में ग्राउंड सपोर्ट मौजूद है।
दूसरी ओर, बीजेपी इस उपचुनाव को हल्के में नहीं लेना चाहती, क्योंकि राष्ट्रीय राजनीति में दिल्ली की भूमिका बेहद अहम रही है। कांग्रेस भी अपनी खोई जमीन वापस पाने के इरादे से चुनाव में आक्रामक है।

वार्ड-वाइज उम्मीदवार (सभी दलों की लिस्ट):

ये मुकाबले बता देंगे कि दिल्ली में राजनीतिक हवा किस दिशा में बह रही है।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव – 2 दिसंबर को विशाल मतदान, 3 दिसंबर को नतीजे

महाराष्ट्र में इस बार नगर निकाय चुनाव सिर्फ स्थानीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वालों में गिने जा रहे हैं।
बीएमसी, पुणे, नागपुर, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली जैसे बड़े नगर निगमों समेत कुल 29 नगर निगमों में वोटिंग होगी।

इसके अलावा—

कुल 6859 सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें—

कौन-कौन मैदान में?

भाजपा, शिवसेना (शिंदे), शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (अजित गुट), एनसीपी (एसपी), मनसे, वंचित बहुजन अघाड़ी और रासप—सभी दल चुनाव में उतर चुके हैं।

फडणवीस-शिंदे-अजित गठबंधन की पहली बड़ी परीक्षा

लोकसभा चुनाव में हार के बाद महायुति को महाराष्ट्र में अपनी पकड़ दोबारा साबित करनी होगी।
कांग्रेस का अकेले लड़ने का निर्णय विपक्षी एकता को चुनौती देता है, और यह चुनाव भाजपा के लिए भी एक प्रतिष्ठित मुकाबला बन जाता है।

अगले साल पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव, दिल्ली-महाराष्ट्र नतीजे देंगे शुरुआती संकेत

2026 में देश के पाँच बड़े राज्यों

में विधानसभा चुनाव होने हैं।

दिल्ली और महाराष्ट्र के नतीजे इन आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक तापमान का पहला संकेत बनेंगे।

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