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बिहार जीत के बाद सुधारों की रफ्तार बढ़ाने को तैयार मोदी सरकार

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 28 नवंबर: बिहार विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत ने केंद्र सरकार को नई राजनीतिक ऊर्जा दे दी है। इस जीत ने लंबे समय से रुके पड़े सुधारों को फिर से गति देने के लिए मोदी सरकार को बड़ा आत्मविश्वास प्रदान किया है। सरकार शीतकालीन सत्र में कुल 10 नए विधेयक लाने जा रही है, जिनमें ऊर्जा, शिक्षा, बीमा और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े कई बड़े सुधार शामिल हैं।

इसकी शुरुआत उस लेबर कोड को लागू कर दी गई है जो पांच वर्षों से लंबित था। अब सरकार परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है। एटॉमिक एनर्जी बिल, 2025 पहली बार निजी कंपनियों को भारत के न्यूक्लियर सेक्टर में प्रवेश का रास्ता देगा। छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन में निजी निवेश की अनुमति मिलना देश की ऊर्जा सुरक्षा और निवेश आकर्षण के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े फैसलों की तैयारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप, सरकार विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए भारत के दरवाज़े खोलने और राष्ट्रीय उच्च शिक्षा आयोग के गठन की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

वित्तीय सुधारों में कॉर्पोरेट लॉज़ अमेंडमेंट बिल, आर्बिट्रेशन बिल, सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल और इंश्योरेंस लॉज़ अमेंडमेंट प्रमुख हैं। बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश की अनुमति देने पर भी सरकार का रुख सकारात्मक है। इसी तरह राजमार्ग निर्माण तेज़ करने के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा बिल भी सत्र में पेश किया जाएगा।

हालांकि विपक्ष ने इस सुधार-लहर का जोरदार विरोध करने की तैयारी कर ली है। न्यूक्लियर क्षेत्र में निजी क्षेत्र की एंट्री को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए विपक्ष संसद में सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। शिक्षा सुधारों को गरीब छात्रों के हितों के खिलाफ बताया जा रहा है, जबकि वित्तीय और बीमा क्षेत्र के सुधारों पर कॉरपोरेट पक्षधरता का आरोप लगाया जा रहा है।

इसके बावजूद, बिहार के जनादेश ने सरकार को यह राजनीतिक भरोसा दिया है कि जनता कड़े लेकिन ज़रूरी सुधारों को समर्थन दे रही है। ऐसे में संकेत साफ हैं कि इस बार सुधारों को ठंडे बस्ते में नहीं रखा जाएगा सरकार ‘रिफॉर्म एक्सलरेटर’ पर पूरा जोर देने को तैयार है।

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