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मौलाना महमूद मदनी बोले- जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा

समग्र समाचार सेवा
भोपाल, 29 नवंबर: जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने भोपाल में दिए बयान में  जिहाद, अदालतों के फैसलों और मौजूदा हालात पर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संघर्ष जैसे पवित्र शब्द को मीडिया और सरकार गलत रूप में लोगों तक पहुँचा रही है।

मदनी ने कहा,
संघर्ष हमेशा पवित्र था और रहेगा। जहां अत्याचार होगा, वहां संघर्ष होगा। इसे प्रेम संघर्ष, थूक संघर्ष या भूमि संघर्ष जैसे शब्दों से जोड़ना गलत है।

उन्होंने दावा किया कि अदालतों के कई फैसलों में अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों का खुला उल्लंघन हुआ है। बाबरी मस्जिद, तीन तलाक और ज्ञानवापी मामलों के फैसलों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इससे ऐसा लगता है कि अदालतें “सरकारी दबाव” में काम कर रही हैं।

मदनी ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जहां जनता द्वारा चुनी गई सरकार काम करती है, वहां संघर्ष की चर्चा का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने कहा कि मुसलमान संविधान के प्रति पूरी तरह निष्ठावान हैं और सरकार का दायित्व है कि वह सभी नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करे।

देश में सामाजिक माहौल को लेकर उन्होंने कहा कि 10% लोग मुसलमानों के समर्थन में हैं, 30% विरोध में, जबकि 60% खामोश हैं। उनका कहना था कि मुसलमानों को इन 60% खामोश नागरिकों से संवाद बढ़ाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाते हुए मदनी ने कहा,
“सुप्रीम कोर्ट तभी सर्वोच्च कहलाने का हकदार है, जब वह संविधान की रक्षा करे। यदि ऐसा नहीं होगा तो उसे नैतिक रूप से सर्वोच्च कहने का अधिकार नहीं रह जाएगा।”

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