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अकबरपुर में बाबा नीम करोली महाराज का 125वां जन्मोत्सव मनाया गया

समग्र समाचार सेवा
फिरोजाबाद (उ.प्र.), 29 नवंबर: उत्तर प्रदेश के आगरा से 35 किमी दूरी पर स्थित अकबरपुर गाँव सुखियों में है। सन 1900 में जन्म लिए बाबा  नीम करोली महाराज जी के 125 वा जन्मोत्सव के शुभ अवसर जन्मस्थली
पर देश-विदेश से लाखों लोग पहुंचे।श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन करने के साथ-साथ प्रसाद ग्रहण किया।

फिरोजाबाद ( यूपी) अकबरपुर गाँव में मनाया गया बाबा नीम करोली महाराज का 125 वा जन्मोत्सव

मूलतः बनारस निवासी व राजस्थान कैडर के आईपीएस व महाराज जी के परमभक्त पंकज चौधरी व धर्मपत्नी मुकुल चौधरी ने सपरिवार दर्शन किया। चौधरी दंपति ने बाबा नीब करौरी की सुपुत्री,दामाद,पौत्र व पारिवारिक सदस्यों से भी मुलाकात किया।महाराज जी के पौत्र धनंजय शर्मा जी जो महाराज जी से कद काठी में हुबहू मिलते जुलते है,ने भक्तों के साथ जन्मोत्सव पर केक काटा। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने जन्मोत्सव पर बेहतर व्यवस्था किया।

मुकुल चौधरी भावुक होकर महाराज जी की बेटी को बताती है की वर्ष 2020 में पति पंकज चौधरी जी सर्विस से बाहर थे और सर्विस में लौटने की उम्मीद ना के बराबर थी उस समय महाराज जी ने हाँथ थामा और कोर्ट से बहाली के आदेश हुए जो ऐतिहासिक रहा।महाराज जी हर वक्त साथ रहते है और दुष्ट आत्माओं से रक्षा भी करते है। मुकुल कहती है सिस्टम पंकज जी को उसी अनुरूप कार्य करने को विवश करना चाहता है पर महाराज जी की कृपा से कोई भी ग़लत कार्य नहीं करने और समाज व देश के लिए बेहतर करने की प्रेरणा मिलती रहती है।महाराज जी ने जीवन का दर्शन दिया है जीवन दान दिया है।महाराज जी एक कवच के रूप में हमेशा साथ रहते है। देश के महान साधु संतों में एक बाबा नीब करौरी महाराज की दूरदृष्टि विलक्षण रही है व परोपकार की अपरंपार अवधारणा अविस्मरणीय है।

महाराज जी की कृपा अपरंपार है। कलियुग के हनुमान कहे जाने वाले बाबा नीम करोली महाराज का समाधि स्थल वृंदावन है और जन्म स्थान फिरोजाबाद के अकबरपुर गाँव में है। महाराज जी की मूर्ति 1976 में कैंची धाम आश्रम में स्थापित हुई थी जहाँ महाराज जी ने जीवन का अधिकांश समय बिताया। ये वही स्थल है जहाँ स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग जैसे व्यवसायी पहुँच कर विश्व के शीर्ष धनाढ्य लोगो में शामिल हुए है। महाराज जी के चमत्कार से रूबरू होने वाले भक्त महिमा को बेहतर जानते है।महाराज जी द्वारा ग़रीब व दुःखी लोगों को सर्व करने व फीड करने की प्रेरणा दी जाती रही है। आज देश-विदेश में महाराज जी के कई आश्रम है। महाराज जी का निश्चल स्वभाव व जनकल्याण की भावना ने जनमानस को जोड़ा है।

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