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बिहार विधानसभा सत्र के कारण पटना में 1 से 5 दिसंबर तक धारा 163 लागू

समग्र समाचार सेवा
पटना, 29 नवंबर: बिहार में नवगठित एनडीए सरकार का पहला और 18वीं विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण सत्र को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए पटना जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। पटना सदर के अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) ने 1 दिसंबर से 5 दिसंबर 2025 तक विधानसभा परिसर और इसके आस-पास के क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है।

यह आदेश इसलिए जारी किया गया है ताकि सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, विरोध प्रदर्शन या हिंसा न हो, जिससे विधानसभा की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न हो।

क्या हैं धारा 163 के मुख्य प्रतिबंध?

जिला प्रशासन द्वारा लागू की गई धारा 163 (जो पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के समान है) के तहत निषेधाज्ञा लागू हो गई है। इसका उद्देश्य विधानसभा सत्र के दौरान कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को बनाए रखना है।

प्रतिबंध लागू:

जमावड़ा और प्रदर्शन: विधानसभा भवन और उसके आस-पास की सड़कों पर पांच या उससे अधिक लोगों का इकट्ठा होना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। किसी भी संगठन या राजनीतिक दल द्वारा धरना-प्रदर्शन, जुलूस या घेराव की अनुमति नहीं होगी।

हथियारों का निषेध: आदेश के अनुसार, किसी भी तरह के आग्नेयास्त्र, विस्फोटक सामग्री, या लाठी, डंडा, फरसा, भाला, छुरा जैसे हथियारनुमा सामान लेकर घूमना दंडनीय अपराध माना जाएगा।

नारेबाजी और लाउडस्पीकर: बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार की नारेबाजी, उत्तेजक भाषण और लाउडस्पीकर का इस्तेमाल भी निषिद्ध रहेगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इन क्षेत्रों में रहेगा प्रतिबंध

अनुमंडल दंडाधिकारी द्वारा जारी आदेश में प्रतिबंधित क्षेत्र की सीमाएं भी तय की गई हैं। यह पाबंदियां मुख्य रूप से विधानसभा, विधान परिषद और सचिवालय क्षेत्र के इर्द-गिर्द लागू होंगी, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

उत्तर: चिड़ियाखाना गेट नंबर एक से विश्वेश्वरैया भवन (वाया नेहरू पथ) तक, कोतवाली टी प्वाइंट तक।

दक्षिण: आर ब्लॉक से रेलवे लाइन तक।

पश्चिम: चितकोहरा गोलंबर होते हुए वेटनरी कॉलेज तक।

पूरब: कोतवाली टी प्वाइंट से बुद्ध मार्ग होते हुए जीपीओ गोलंबर तक।

किसे मिलेगी इस आदेश से छूट?

यह निषेधाज्ञा उन लोगों पर लागू नहीं होगी, जिन्हें संवैधानिक या आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करना है। इस छूट के दायरे में निम्नलिखित लोग शामिल हैं:

ड्यूटी पर तैनात सभी सरकारी अधिकारी, पुलिसकर्मी और कर्मचारी।

विधानसभा, विधान परिषद और संसद के सदस्य, जिन्हें सदन में उपस्थित होना है।

विधानसभा या विधान परिषद सचिवालय का आधिकारिक पास रखने वाले कर्मचारी और आगंतुक।

सरकारी वाहनों और सदन द्वारा जारी पास वाली गाड़ियों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होगी।

यह शीतकालीन सत्र बिहार की नई सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण है, जिसमें राज्यपाल का अभिभाषण, अनुपूरक व्यय विवरण पर वाद-विवाद, और नव निर्वाचित अध्यक्ष का निर्वाचन जैसी प्रमुख कार्यवाही होगी। इस दौरान विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।

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