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तमिलनाडु में दलित महिला को मिड-डे मील बनाने से रोकने का मामला

समग्र समाचार सेवा
तिरुपुर, 30 नवंबर: देश में तमाम कानूनों और जागरूकता अभियानों के बावजूद जातिगत भेदभाव के मामले सामने आते रहते हैं। ताज़ा मामला तमिलनाडु के तिरुपुर जिले का है, जहां एक विशेष अदालत ने दलित महिला रसोइया को मिड-डे मील बनाने से रोकने के आरोप में छह लोगों को दो-दो साल कैद की सजा सुनाई है। यह घटना वर्ष 2018 की है।

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत ने पी. पलानीसामी गौंडर, एन. शक्तिवेल, आर. षणमुगम, सी. वेलिंगिरी, ए. दुरैसामी और वी. सीता लक्ष्मी को दोषी माना। सभी छह आरोपी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक थे।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, थिरुमलाई गौंडमपलायम के सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में रसोइया पी. पप्पल (44) को जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा था। अभिभावकों ने आपत्ति जताई थी कि दलित महिला उनके बच्चों के लिए खाना क्यों पका रही है। यह विरोध इतना बढ़ा कि रसोइया को बाद में स्थानांतरित तक करना पड़ा।

दलित महिला के साथ हुए भेदभाव के विरोध में तमिलनाडु अस्पृश्यता उन्मूलन मोर्चा के सदस्यों ने उस समय जोरदार प्रदर्शन किया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह घटना न केवल व्यक्ति विशेष बल्कि समाज के लिए भी अपमानजनक है और ऐसे अपराधों पर सख़्ती से कार्रवाई आवश्यक है।

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