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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के एक साल पूरे

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 05 दिसंबर: बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की पहली वर्षगांठ के मौके पर गुरुवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एक महत्त्वपूर्ण आयोजन हुआ। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर की मौजूदगी में मंत्रालय ने 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान की औपचारिक शुरुआत की।

केंद्र सरकार ने इस राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत 27 नवंबर 2024 को की थी, जिसका उद्देश्य बाल विवाह को जड़ से समाप्त करना और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए सामुदायिक आंदोलन तैयार करना है।

इस कार्यक्रम में बाल अधिकार कार्यकर्ता और जस्ट राइट्स फ़ॉर चिल्ड्रेन (JRC) के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि बाल विवाह को रोकने की लड़ाई केवल सरकारी नीतियों तक सीमित नहीं है—इसमें सामुदायिक समूहों, धार्मिक नेताओं, पंचायतों और नागरिकों की भूमिका सबसे अधिक निर्णायक है।

उन्होंने कहा, “सरकार का बाल विवाह मुक्त भारत अभियान अब वैश्विक मॉडल बन चुका है। यह हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है कि हम बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को समाप्त करने के लिए एकजुट हैं।”

ऋभु ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले वर्ष देशभर में एक लाख से अधिक बाल विवाह रोके गए, जो इस बात का प्रमाण है कि समाज जब संगठित होता है तो परिवर्तन निश्चित होता है।

उन्होंने बताया कि अगले एक वर्ष में लक्ष्य है कि एक लाख गांवों को बाल विवाह मुक्त गांव घोषित किया जाए, ताकि हर बच्चे को सुरक्षित वातावरण और विकास के अवसर मिल सकें।

जस्ट राइट्स फ़ॉर चिल्ड्रेन वर्तमान में देश के 450 जिलों में कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ साझेदारी में काम कर रहे 250+ नागरिक समाज संगठनों का नेटवर्क संचालित करता है। संगठन का मानना है कि यह जन-सहभागिता विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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