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स्वागत है राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकोल तोड़कर रूसी राष्ट्रपति का हवाईअड्डे पर किया स्वागत

समग्र समाचार सेवा
।नई दिल्ली। 04 दिसंबर:गुरुवार शाम रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब दिल्ली पहुंचे, तो पालम एयरपोर्ट का दृश्य सामान्य राजनयिक औपचारिकताओं से बिल्कुल अलग था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद एयरपोर्ट पर पहुंचे, पुतिन को देखकर मुस्कुराए, गले मिले और गर्मजोशी दिखाकर एक मजबूत संदेश दिया, भारत अपनी मित्रता को शब्दों से नहीं, व्यवहार से साबित करता है।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया की राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है। यूक्रेन युद्ध, बिगड़ते वैश्विक समीकरण और भारत-अमेरिका रिश्तों में आई खटास के बीच पुतिन का यह 27 घंटे का दौरा सिर्फ कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और रणनीतिक दोनों तरह का संकेत है।

एयरपोर्ट से पीएम आवास तक: सिर्फ यात्रा नहीं, संदेश था

शाम 6:45 बजे पुतिन का विमान उतरा। कुछ मिनट बाद दोनों नेता जापानी कंपनी टोयोटा की एसयूवी में एक साथ बैठे और निकल पड़े। पीएमओ के पास कई यूरोपीय लग्जरी कारें मौजूद हैं, लेकिन इस यात्रा के लिए एशियाई ब्रांड का चयन बहुत कुछ कह गया, भारत अपने फैसले खुद करता है और अपने मेहमानों के लिए माहौल भी खुद ही तय करता है।

पीएम आवास पहुंचने पर दोनों नेताओं ने सीमित अधिकारियों के साथ निजी रात्रिभोज किया। आधिकारिक तौर पर एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन सूत्र बताते हैं कि ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, वैश्विक तनाव, और शुक्रवार को होने वाले वार्षिक सम्मेलन के अहम समझौतों पर चर्चा लगभग तय मानी जा रही है।

मोदी ने रात को ‘एक्स’ पर लिखा, मित्र पुतिन का भारत में स्वागत कर खुशी हुई। यह सिर्फ औपचारिक टिप्पणी नहीं, बल्कि उस भरोसे की पुनर्पुष्टि है जो दोनों देशों के रिश्तों को दशकों से मजबूती देता आया है।

भारत-अमेरिका तनाव की पृष्ठभूमि में बेहद अहम मुलाकात

भारत ने यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदा। इससे अमेरिका और यूरोपीय देशों की नाराज़गी सामने आई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो भारतीय आयात पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाकर नाराज़गी को नीति में बदल दिया।

लेकिन भारत का रुख साफ़ रहा,ऊर्जा जरूरतें किसी भी वैश्विक दबाव से ज्यादा अहम हैं।

ऐसे वातावरण में पुतिन का भव्य स्वागत दुनिया को एक साफ संदेश देता है, भारत अपने रणनीतिक हितों के साथ खड़ा है, चाहे वैश्विक दबाव कितना भी क्यों न हो।

मोदी क्वचित ही एयरपोर्ट जाते हैं, यह स्वागत क्यों खास है?

प्रधानमंत्री मोदी कुछ ही नेताओं को स्वयं हवाईअड्डे पर रिसीव करने जाते हैं। यह सम्मान अब तक सिर्फ
ओबामा, ट्रंप, शेख हसीना, शिंजो आबे, एमबीजेड और कतर के अमीर को मिला था।
इस सूची में पुतिन का नाम जुड़ना भारत-रूस रिश्तों के विशेष महत्व को और पुख्ता करता है।

युद्ध, कूटनीति और एक दिलचस्प संयोग

पुतिन 2021 में भारत आए थे। उसके दो महीने बाद यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ।
इस बार वह तब आए हैं जब अमेरिकी मध्यस्थता के बाद युद्धविराम की संभावनाएँ सबसे ज्यादा दिख रही हैं।
कहा जा रहा है कि यात्रा से पहले उन्होंने अमेरिकी प्रस्ताव पर विस्तृत विचार-विमर्श किया है।

यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है और दोनों देशों के शीर्ष नेता इस बदलते परिदृश्य के केंद्र में हैं।

शुक्रवार का पुतिन एजेंडा

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