Site icon Samagra Bharat News website

उच्च शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 लोकसभा में पेश

उच्च शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 लोकसभा में पेश

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 16 दिसंबर: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को लोकसभा में ‘उच्च शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025’ पेश किया। यह बिल भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का कहना है कि यह बिल छात्र-केंद्रित और गुणवत्ता आधारित शिक्षा को सुनिश्चित करेगा।

बिल का उद्देश्य

विकसित भारत शिक्षा बिल 2025 के तहत एक मुख्य आयोग का गठन किया जाएगा, जो सभी कॉलेज और विश्वविद्यालयों की निगरानी करेगा। यह आयोग यह तय करेगा कि कौन-सा सिलेबस पढ़ाया जाए, संस्थाएं नियमों का सही पालन कर रही हैं या नहीं, और कौन-से कॉलेज उच्च शिक्षा के मानकों पर खरे उतर रहे हैं।

मुख्य आयोग के तहत तीन परिषदें भी गठित की जाएँगी।

इसमे पहला नियामक परिषद होगा जिसका काम
कॉलेज और विश्वविद्यालयों के संचालन की निगरानी।
वित्तीय पारदर्शिता और संसाधनों के सही उपयोग पर ध्यान।
छात्रों और शिक्षकों की शिकायतों का त्वरित समाधान करना होगा।

इसके अलावा मान्यता परिषद (Accreditation Council):
संस्थाओं की गुणवत्ता और मान्यता का निर्धारण।
मान्यता से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करना।

मानक परिषद (Standards Council):
पढ़ाई के स्तर और शिक्षण मानक तय करना।
क्रेडिट ट्रांसफर और छात्रों की आवाजाही को आसान बनाना।
शिक्षकों के प्रशिक्षण और दक्षता को बढ़ावा देना।

कानून किन संस्थाओं पर लागू होगा?

यह बिल सभी केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों, डीम्ड विश्वविद्यालयों, IIT, NIT, कॉलेजों, ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा। मेडिकल, कानून, फार्मेसी और नर्सिंग जैसे कोर्स भी नए मानकों का पालन करेंगे।

सरकार की भूमिका

आयोग को दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन देना।
प्रमुख पदों पर नियुक्तियां करना।
विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में शिक्षा देने की अनुमति देना।
सभी संस्थाओं से सालाना रिपोर्ट और ऑडिट प्राप्त करना।

सरकार का कहना है कि यह प्रणाली छात्रों के लिए पारदर्शी और गुणवत्ता युक्त शिक्षा सुनिश्चित करेगी, और छोटे व नए कॉलेजों को भी विकास के समान अवसर प्रदान करेगी।

बिल से होने वाले बदलाव

सभी कॉलेज और विश्वविद्यालय समान मानकों के तहत काम करेंगे।
नए कॉलेज खोलना और नए पाठ्यक्रम शुरू करना आसान होगा।
पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ेगी और छात्र-केंद्रित शिक्षा सुनिश्चित होगी।
शिकायत निवारण तंत्र मजबूत होगा और छात्रों की समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा।
छात्रों को भविष्य की नौकरी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाएगा।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल भारत को उच्च शिक्षा में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा। छात्रों और शिक्षकों के लिए पारदर्शिता बढ़ाने से शिक्षा में गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। आयोग द्वारा नियमित निगरानी से सभी संस्थाओं में समान अवसर और बेहतर शैक्षणिक परिणाम आएंगे।

सरकार का कहना है कि बिल छात्र-केंद्रित और भविष्य उन्मुख शिक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

Exit mobile version